खनन कानून के खिलाफ ओडिशा कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, 7 अक्टूबर को केंदुझार में रैली का ऐलान
केंदुझार। ओडिशा में कांग्रेस ने ‘माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट एक्ट, 2026’ के खिलाफ आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। पार्टी और उसके सहयोगी दल 7 अक्टूबर को खनिज संपदा से भरपूर केंदुझार जिले में बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि संशोधित कानून के प्रावधान खनिज क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों और आम लोगों के हितों को प्रभावित करेंगे। केंद्र सरकार ने इन आरोपों से अलग रुख रखते हुए कहा है कि संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में एक समान और स्थिर वित्तीय व्यवस्था बनाना है।
कांग्रेस विधायक और पीसीसी के मुख्य पर्यवेक्षक तारा प्रसाद बहिनीपति ने गुरुवार को केंदुझार स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में आंदोलन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल संशोधित खनन कानून के विरोध में 7 अक्टूबर को जिले में अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकजुट करेंगे।
बहिनीपति ने कहा कि प्रस्तावित आंदोलन केवल रैली तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी विरोध के तहत केंदुझार जिले से पाइपलाइन के माध्यम से होने वाले खनिज परिवहन को रोकने की कोशिश भी करेगी। उन्होंने कहा कि यह विरोध शुरुआत में सात दिनों तक चलाने की योजना है।
खनिज परिवहन रोकने की घोषणा के कारण आंदोलन का असर जिले की खनन गतिविधियों पर पड़ सकता है। हालांकि यह विरोध किस तरीके से किया जाएगा और प्रशासन की ओर से इसके लिए क्या व्यवस्था की जाएगी, इसे लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
कांग्रेस नेता ने संशोधित कानून को लेकर कई सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इसका असर खनिज संपदा वाले क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों और स्थानीय निवासियों के अधिकारों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से मिलने वाले लाभ में स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
केंद्र सरकार का कहना है कि संशोधन से राज्यों के भूमि और खनिज संबंधी सभी अधिकार समाप्त नहीं होते। केंद्रीय खान मंत्रालय के अनुसार खनन क्षेत्र से मिलने वाले करों और वैधानिक भुगतानों का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को जाता है और संशोधन के बाद भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। केंद्र ने यह भी कहा है कि राज्यों के लघु खनिजों को विनियमित करने और उन पर कर लगाने की शक्तियों पर संशोधन का असर नहीं पड़ेगा।
माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 को 10 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था। लोकसभा ने इसे 12 अगस्त और राज्यसभा ने 13 अगस्त को पारित किया। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह 17 अगस्त को कानून बना और केंद्र सरकार ने 22 अगस्त से इसके प्रावधान लागू कर दिए।
संशोधन में खनिज अधिकारों और खनिज वाली भूमि पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले कुछ कर, उपकर और अन्य लेवी पर शर्तें या प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर व्यवस्थाओं के कारण खनन क्षेत्र पर वित्तीय बोझ और अनिश्चितता बढ़ती है। संशोधन के जरिए अधिक स्थिर और पूर्वानुमान योग्य व्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर संवैधानिक और संघीय ढांचे से जुड़े सवाल भी उठे हैं। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने अपने विश्लेषण में खनिज वाली भूमि के नियमन और राज्यों की कर लगाने की शक्तियों पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़े कुछ कानूनी मुद्दों की ओर ध्यान दिलाया है।
केंदुझार ओडिशा के प्रमुख खनिज क्षेत्रों में शामिल है। जिले की अर्थव्यवस्था और रोजगार का एक हिस्सा खनन तथा उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। ऐसे में कांग्रेस ने अपने राज्यव्यापी राजनीतिक विरोध के लिए केंदुझार को महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है।
बहिनीपति ने आरोप लगाया कि खनिज संपदा वाले क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर संसाधन निकाले जाते हैं, लेकिन वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिलती। पार्टी का कहना है कि आदिवासी समुदायों और खनन प्रभावित इलाकों के लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जयदेव जेना, केंदुझार जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज जेना और पार्टी के कई अन्य नेता मौजूद रहे। नेताओं ने 7 अक्टूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम में जिले के अलग-अलग हिस्सों से कार्यकर्ताओं और समर्थकों को शामिल करने की योजना पर चर्चा की।
कांग्रेस की ओर से पूरे जिले में कार्यकर्ताओं को संगठित करने की तैयारी की जा रही है। पार्टी का लक्ष्य प्रस्तावित रैली में खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को भी शामिल करना है। आने वाले दिनों में आंदोलन के कार्यक्रम और रणनीति को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
दूसरी तरफ केंद्र सरकार संशोधित कानून को खनन क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और स्थिरता बढ़ाने वाला कदम बता रही है। खान मंत्रालय का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में करों और लेवी की अनिश्चितता से निवेश और खनन गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। सरकार के मुताबिक एक समान वित्तीय ढांचे से उद्योग को दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी।
इस तरह संशोधित MMDR कानून को लेकर केंद्र और कांग्रेस के रुख में स्पष्ट अंतर है। कांग्रेस जहां इसे आदिवासी और स्थानीय हितों से जोड़कर विरोध कर रही है, वहीं केंद्र इसे खनन क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता और निवेश को प्रोत्साहित करने वाला सुधार बता रहा है।
अब 7 अक्टूबर को प्रस्तावित केंदुझार रैली पर नजर रहेगी। कांग्रेस ने रैली के साथ सात दिनों तक पाइपलाइन के जरिए खनिज परिवहन रोकने की कोशिश करने की घोषणा की है। ऐसे में जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था तथा खनिज परिवहन को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।