गंजाम। ओडिशा के गंजाम जिले से इंसानियत, पारिवारिक जिम्मेदारी और ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल सड़क व्यवस्था की एक मार्मिक घटना सामने आई है। चक्रवात 'अर्णब' के कारण हुई मूसलाधार बारिश ने कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से तोड़ दिया है। इसी बीच पात्रापुर ब्लॉक की अंकुली पंचायत के अलियार गांव में एक महिला को अपने मृत चाचा का शव लगभग पांच किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा। मृतक की पहचान शंकर करजी के रूप में हुई है, जो ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थे। उनकी भतीजी ललिता प्रधान लंबे समय से उनके इलाज की व्यवस्था कर रही थीं। गंभीर बीमारी के कारण शंकर करजी को पहले बेरहामपुर और बाद में कटक के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर को गांव तक पहुंचाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया। भारी बारिश से सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण शव ले जा रहा वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। आखिरकार ललिता प्रधान को अपने चाचा का पार्थिव शरीर कंधे पर उठाकर करीब पांच किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंजाम जिले के पात्रापुर ब्लॉक की अंकुली ग्राम पंचायत के अंतर्गत अलियार गांव निवासी शंकर करजी पिछले कुछ समय से ब्रेन ट्यूमर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी तबीयत बिगड़ने पर भतीजी ललिता प्रधान ने उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास शुरू किया।
ललिता अपने चाचा को 2 अक्टूबर को इलाज के लिए बेरहामपुर स्थित महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमकेसीजी) लेकर गई थीं। वहां चिकित्सकीय देखरेख में उनका उपचार किया गया। हालांकि बीमारी की गंभीरता को देखते हुए उन्हें आगे के इलाज की आवश्यकता पड़ी।
इसके बाद 18 अक्टूबर को शंकर करजी को कटक स्थित श्रीराम चंद्र भंज मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एससीबी) स्थानांतरित किया गया। यह अस्पताल ओडिशा के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल है, जहां गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विभिन्न क्षेत्रों से मरीज पहुंचते हैं।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, उपचार के दौरान शंकर करजी का निधन हो गया। इसके बाद परिवार के सामने उनके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव पहुंचाने की कठिन समस्या खड़ी हो गई।
परिवार ने शव को गांव तक ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था की, लेकिन इसी बीच चक्रवात अर्णब के प्रभाव से गंजाम जिले में भारी बारिश हो चुकी थी। बारिश के कारण कई ग्रामीण मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए थे और अनेक स्थानों पर आवागमन बाधित था।
अलियार गांव तक पहुंचने वाला रास्ता भी प्रभावित हुआ। शव लेकर जा रहा वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। ऐसी स्थिति में परिवार के पास पैदल आगे बढ़ने के अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा।
जानकारी के मुताबिक, ललिता प्रधान ने अपने चाचा के शव को कंधे पर उठाया और लगभग पांच किलोमीटर का रास्ता तय करते हुए गांव पहुंचीं। इस घटना ने दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क और आपातकालीन परिवहन की समस्याओं को फिर सामने ला दिया है।
अंकुली पंचायत के कई गांव पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। इन इलाकों में सड़क संपर्क लंबे समय से एक महत्वपूर्ण समस्या रही है। वर्ष 2019 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी अंकुली और बुरातला पंचायतों के अनेक गांवों में सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का उल्लेख किया गया था।
चक्रवात अर्णब ने इस वर्ष दक्षिण ओडिशा में व्यापक नुकसान पहुंचाया है। विशेष रूप से गंजाम और गजपति जिले भारी बारिश तथा बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर सड़कें बह गईं, पुलों को नुकसान पहुंचा और गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया।
29 अक्टूबर को जारी बारिश के आंकड़ों के अनुसार, गंजाम जिले के पात्रापुर में 24 घंटे के दौरान 546 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह संबंधित अवधि में राज्य के सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में शामिल था। इतनी अधिक बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण सड़कों पर आवागमन बाधित हुआ।
चक्रवात के प्रभाव से गंजाम जिले के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ गया। अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पहुंचने के कारण लोग अपने घरों में फंस गए। राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन को विशेष टीमें तैनात करनी पड़ीं।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, गंजाम और गजपति जिलों के एक हजार से अधिक गांव चक्रवात के बाद हुई भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हुए। गंजाम में लगभग 299 गांव और गजपति में 711 गांवों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
कई क्षेत्रों में बाढ़ के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल और अग्निशमन विभाग की टीमों को लगाया गया। कुछ स्थानों पर भारतीय तटरक्षक बल के हेलीकॉप्टर की भी सहायता ली गई।
शंकर करजी का शव गांव तक पहुंचाने में आई कठिनाई इसी व्यापक प्राकृतिक आपदा के बीच सामने आई है। हालांकि इस विशेष घटना में स्थानीय प्रशासन से परिवार को किस प्रकार की सहायता मिली या नहीं मिली, इसका विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मजबूत सड़क संपर्क की आवश्यकता को उजागर करती है। किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने और उपचार के बाद वापस घर लाने के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था अत्यंत आवश्यक होती है।
विशेष रूप से पहाड़ी और दूरदराज के गांवों में सड़कें क्षतिग्रस्त होने पर एंबुलेंस तथा अन्य वाहनों का पहुंचना कठिन हो सकता है। आपदा की स्थिति में यह समस्या और गंभीर रूप ले लेती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बनाए रखने के लिए बरसात से पहले आवश्यक मरम्मत और आपातकालीन वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा दुर्घटना, बीमारी या अन्य आपात स्थिति में स्थानीय लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी आवश्यक है।
ललिता प्रधान की इस घटना में एक और महत्वपूर्ण पहलू परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने चाचा का इलाज कराने के लिए अलग-अलग अस्पतालों तक पहुंचने का प्रयास किया। निधन के बाद भी पार्थिव शरीर को गांव पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई।
हालांकि किसी परिवार को शव कंधे पर लेकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़े, यह सार्वजनिक सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। किसी भी नागरिक के लिए अंतिम संस्कार से जुड़ी व्यवस्थाओं तक सुरक्षित पहुंच होना आवश्यक है।
ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन, पंचायत और आपदा प्रबंधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय उपयोगी हो सकता है। विशेष रूप से जिन गांवों का संपर्क प्राकृतिक आपदा के दौरान कट जाता है, वहां राहत और परिवहन सहायता की व्यवस्था को प्राथमिकता देने की आवश्यकता होती है।
फिलहाल चक्रवात अर्णब के बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत और सड़क संपर्क बहाल करने के प्रयास जारी हैं। प्रशासन के सामने बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत और आवश्यक सुविधाओं को दोबारा शुरू करने की चुनौती है।
गंजाम जिले के अलियार गांव में ललिता प्रधान द्वारा चाचा का शव कंधे पर उठाकर ले जाने की घटना प्राकृतिक आपदा के बीच ग्रामीण परिवारों के सामने आने वाली कठिनाइयों की गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करती है।
यह घटना इस सवाल को भी सामने लाती है कि दुर्गम गांवों में आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान परिवहन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता किस प्रकार सुनिश्चित की जाए। फिलहाल परिवार से जुड़ी इस मार्मिक घटना ने सड़क संपर्क और आपदा प्रबंधन की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित किया है।