जगतसिंहपुर। ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए विजिलेंस अधिकारियों ने कुजंग कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) के ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (NHM) मनोज रंजन नायक को कथित तौर पर ₹20,000 की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। आरोप है कि नायक ने एक आशा वर्कर से उसकी नौकरी और रिटायरमेंट से जुड़े दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी का हवाला देकर पैसे की मांग की थी।

ओडिशा विजिलेंस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने मामले की जांच की और गुरुवार को जाल बिछाकर आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

जन्मतिथि को लेकर बनाया दबाव

विजिलेंस के मुताबिक, शिकायतकर्ता आशा वर्कर की नौकरी में अभी करीब दो साल का समय बाकी था। उसकी सेवा अवधि स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर तय थी। नियुक्ति के समय आशा वर्कर ने संबंधित दस्तावेज विभाग में जमा किए थे।

स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में उसकी जन्मतिथि 17 मई 1966 दर्ज थी। इसी आधार पर उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख तय होनी थी।

आरोप है कि ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर मनोज रंजन नायक ने आशा वर्कर के आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि आधार कार्ड में दर्ज जानकारी के आधार पर उसकी सेवानिवृत्ति जल्दी हो सकती है।

नौकरी खत्म होने की धमकी का आरोप

शिकायत के अनुसार, अधिकारी ने कथित तौर पर आशा वर्कर पर दबाव बनाया और कहा कि यदि उसने ₹20,000 नहीं दिए तो उसकी नौकरी पर असर पड़ सकता है। आरोप है कि उसे नौकरी खत्म किए जाने की धमकी भी दी गई।

इससे परेशान होकर आशा वर्कर ने विजिलेंस अधिकारियों से संपर्क किया और पूरी घटना की शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने आरोपों की प्रारंभिक जांच की और कार्रवाई की योजना बनाई।

जांच एजेंसी के अनुसार, शिकायत की पुष्टि के बाद आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ने के लिए ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया गया।

रंगे हाथ पकड़ने के लिए बिछाया जाल

गुरुवार को विजिलेंस अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की। बताया गया कि मनोज रंजन नायक को आशा वर्कर से ₹20,000 लेते हुए पकड़ लिया गया।

कार्रवाई के बाद विजिलेंस टीम ने मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने शुरू किए। अधिकारी की भूमिका और शिकायत में लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच की जा रही है।

विजिलेंस विभाग ऐसे मामलों में रिश्वत की मांग और लेनदेन से जुड़े तथ्यों को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखता है। अब यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी अधिकारी ने पहले भी इसी तरह किसी अन्य कर्मचारी या स्वास्थ्यकर्मी पर दबाव बनाया था।

सेवा रिकॉर्ड और आधार कार्ड की जांच

इस मामले में आशा वर्कर की सेवा से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। खास तौर पर स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि और आधार कार्ड में मौजूद विवरण के बीच अंतर को लेकर अधिकारी द्वारा उठाए गए सवालों की जांच की जाएगी।

विजिलेंस यह भी पता लगाएगी कि संबंधित अधिकारी को सेवा रिकॉर्ड में बदलाव या सेवानिवृत्ति की तारीख से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार था या नहीं। इसके अलावा, यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की वास्तविक विसंगति थी तो उसे दूर करने की आधिकारिक प्रक्रिया क्या थी, इसकी भी जांच हो सकती है।

रिश्वत के आरोप ने उठाए सवाल

घटना ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर प्रशासनिक दबाव और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आशा वर्कर ग्रामीण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे कर्मचारियों को नौकरी से जुड़ी प्रक्रिया में किसी अधिकारी द्वारा कथित रूप से धमकाया जाना गंभीर मामला माना जा रहा है।

विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है।

शिकायत के बाद सामने आई कार्रवाई

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि शिकायतकर्ता ने कथित दबाव के आगे झुकने के बजाय विजिलेंस विभाग से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर अधिकारियों ने कार्रवाई की और आरोपी को कथित रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

विजिलेंस अधिकारियों की ओर से मामले में आगे की जांच जारी है। जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि ₹20,000 की मांग किस उद्देश्य से की गई थी और क्या आरोपी ने वास्तव में आशा वर्कर की सेवा समाप्त करने या उसकी सेवानिवृत्ति को प्रभावित करने की स्थिति का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया था।

फिलहाल मनोज रंजन नायक की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ रही है। विजिलेंस टीम आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने के साथ-साथ शिकायतकर्ता के दस्तावेजों और सेवा रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों और आरोपों की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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