कटक: उड़ीसा उच्च न्यायालय ने 2017 में कोरापुट जिले के जेयपोर टाउन पुलिस स्टेशन में 28 वर्षीय आकाश महुरिया की हिरासत में मौत में शामिल होने के आरोपी तीन पुलिस कर्मियों की जमानत याचिका बुधवार को खारिज कर दी।

जमानत देने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति वी. नरसिंह ने कहा, "कानून के शासन द्वारा शासित समाज हिरासत में मौत की नहीं, बल्कि अनुशासन की अपेक्षा करता है; क्योंकि हिरासत संवैधानिक अधिकारों को ताक पर रखने का लाइसेंस नहीं है।"

तीन याचिकाकर्ता कांस्टेबल देबेंद्र कुमार पाइक, अतिरिक्त उप-निरीक्षक कृष्ण चंद्र बेहरा और उप-निरीक्षक सिबा प्रसाद साहू 29 अगस्त, 2025 से हिरासत में हैं। उन पर 30 जनवरी, 2017 को महुरिया की मौत का आरोप है।

न्यायमूर्ति नरसिंह ने कहा कि इस स्तर पर आरोपी को रिहा करने से मुकदमे की पवित्रता कमजोर हो सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय तक कैद में रहना ही जमानत देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता, खासकर ऐसे मामले में जिसमें नागरिकों के जीवन की रक्षा करने वाले पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में हिंसा के आरोप शामिल हों।

 

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