भुवनेश्वर: रविवार को राजधानी में आयोजित एक सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि जंगल कटने, माइनिंग, औद्योगीकरण, प्रदूषण, कीटनाशकों के ज़्यादा इस्तेमाल, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की वजह से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इससे फायदेमंद कीड़ों और पक्षियों, खासकर परागण करने वाले जीवों (पॉलिनेटर्स) के लिए खतरा बढ़ रहा है।
ओडिशा एनवायरनमेंटल सोसाइटी (OES) ने 'पर्यावरण का नुकसान: परागण पर असर' विषय पर यह सेमिनार आयोजित किया था। इसमें पारिस्थितिक संतुलन, जैव विविधता और कृषि उत्पादकता बनाए रखने में मधुमक्खियों, तितलियों, पतंगों, भृंगों (बीटल्स) और कुछ खास तरह की मक्खियों की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया गया।
OUAT के पूर्व प्रोफेसर और ICAR-एमेरिटस साइंटिस्ट चित्त रंजन सतपथी ने कहा कि जंगलों, घास के मैदानों और फूलों वाले पौधों के खत्म होने से परागण करने वाले जीवों के प्राकृतिक आवास और भोजन के स्रोत कम हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि केमिकल कीटनाशकों के बहुत ज़्यादा और अंधाधुंध इस्तेमाल से जिन कीटों को खत्म करना है, उनके साथ-साथ फायदेमंद कीड़े भी मर सकते हैं। साथ ही, हवा और पानी का प्रदूषण कीड़ों की सेहत और प्रजनन पर भी असर डाल सकता है।