ओडिशा : खनिज संसाधनों को लेकर सियासत तेज हो गई है। बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष और राज्य के विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने राज्य के सभी भाजपा लोकसभा सांसदों को पत्र लिखकर 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' का विरोध करने की अपील की है।
नवीन पटनायक ने आरोप लगाया है कि इस संशोधन बिल से ओडिशा का अपने खनिज संसाधनों पर नियंत्रण कमजोर हो जाएगा और इसका राज्य के हितों पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
भाजपा सांसदों से की अपील
अपने पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भाजपा सांसदों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर "अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें" और ओडिशा की आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाएं।
उन्होंने सांसदों से मांग की कि वे MMDR एक्ट में किए गए संशोधनों का विरोध करें और इन्हें वापस लेने की दिशा में प्रयास करें।
पटनायक ने कहा कि ओडिशा देश के सबसे समृद्ध खनिज संसाधनों वाले राज्यों में से एक है और राज्य के हितों की रक्षा करना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
लोकसभा में बिल पास होने को बताया काला दिन
नवीन पटनायक ने 13 अगस्त को लोकसभा में MMDR बिल के पारित होने को ओडिशा के लिए "काला दिन" बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इतने महत्वपूर्ण कानून को बहुत कम चर्चा के बाद मंजूरी दे दी गई। पटनायक का कहना है कि इस कानून के राज्य पर व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों में राज्यों की भूमिका और अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
ओडिशा की खनिज संपदा का किया जिक्र
नवीन पटनायक ने अपने पत्र में कहा कि भारत की कुल खनिज संपदा में ओडिशा की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि राज्य ने दशकों से देश के स्टील, बिजली, खनन और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के विकास में अपने खनिज संसाधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पटनायक ने कहा कि ओडिशा के प्राकृतिक संसाधन केवल राज्य की संपत्ति नहीं बल्कि देश के औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं।
राज्य के अधिकारों को लेकर उठाया मुद्दा
BJD अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नए संशोधन से खनिज संसाधनों पर राज्यों की भूमिका सीमित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि खनिजों से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों, राज्य सरकार और पर्यावरणीय हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।
पटनायक ने केंद्र सरकार से इस कानून पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
BJD और भाजपा के बीच बढ़ी राजनीतिक तल्खी
MMDR संशोधन बिल को लेकर BJD और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। ओडिशा में दोनों दल खनिज संसाधनों और राज्य के अधिकारों को लेकर आमने-सामने हैं।
BJD लगातार केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा की ओर से इस कानून को देश के खनिज क्षेत्र में सुधार और विकास के लिए जरूरी बताया जाता रहा है।
खनिज क्षेत्र ओडिशा की अर्थव्यवस्था का आधार
ओडिशा में लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और अन्य खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की बड़ी भूमिका है।
खनन से मिलने वाले राजस्व, रोजगार और औद्योगिक विकास को देखते हुए खनिज नीति राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा माना जाता है।
सांसदों की भूमिका पर जोर
नवीन पटनायक ने अपने पत्र में भाजपा सांसदों से कहा कि वे पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के हितों को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि ओडिशा के संसाधनों और अधिकारों की रक्षा के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए।
आगे बढ़ सकता है विवाद
MMDR संशोधन बिल को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। BJD इस मुद्दे को राज्य के अधिकारों से जोड़कर उठा रही है।
अब नजर इस बात पर है कि ओडिशा के भाजपा सांसद इस अपील पर क्या रुख अपनाते हैं और संसद में इस मुद्दे को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।