भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में शनिवार को 'नेशनल अर्बन कॉन्क्लेव 2026' के दूसरे संस्करण का शुभारंभ हुआ। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के नीति-निर्माता, शहरी विकास विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारक हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना और टिकाऊ, आधुनिक तथा नागरिकों के अनुकूल शहरों के विकास के लिए प्रभावी रणनीतियां तैयार करना है।आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा ओडिशा सरकार के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष सम्मेलन की थीम 'अर्बन राइजिंग – शहरी प्रणालियों, समाधानों और सेवाओं की डिलीवरी पर पुनर्विचार' रखी गई है। इसके माध्यम से शहरी विकास की मौजूदा व्यवस्थाओं में सुधार और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने किया उद्घाटन
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने शहरी प्रशासन को मजबूत बनाने, बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और नागरिक सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि शहरों का विकास केवल बड़ी इमारतों और सड़कों के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार भी शहरी विकास का महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए।सम्मेलन में इस बात पर विशेष चर्चा की जा रही है कि शहरों में बढ़ती आबादी के अनुरूप परिवहन, आवास, स्वच्छता, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किस प्रकार किया जाए।
शहरी विकास की चुनौतियों पर मंथन
भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण महानगरों के साथ छोटे और मध्यम शहरों में भी बुनियादी सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। बढ़ती आबादी के कारण यातायात व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं।ऐसे में नेशनल अर्बन कॉन्क्लेव 2026 को शहरी विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार साझा करने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।सम्मेलन में विशेषज्ञों के बीच आधुनिक तकनीक, डिजिटल सेवाओं और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्थाओं के माध्यम से शहरी समस्याओं का समाधान तलाशने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।इसके अलावा, शहरों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर
सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण विषय नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर पेयजल, स्वच्छता, सड़क, सार्वजनिक परिवहन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना स्थानीय प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।इस दिशा में नगर निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाने जैसे उपाय महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक शहरों के विकास के लिए केवल बुनियादी ढांचे में निवेश पर्याप्त नहीं है, बल्कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है।
टिकाऊ और आधुनिक शहरों के निर्माण पर चर्चा
सम्मेलन की थीम के अनुरूप शहरी विकास में दीर्घकालिक योजनाओं को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और सीमित प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए टिकाऊ शहरी विकास की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।शहरों में हरित क्षेत्रों का विस्तार, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, ऊर्जा दक्षता और प्रभावी कचरा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं भविष्य की शहरी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को अपने अनुभव, सुझाव और नवाचार साझा करने का अवसर मिलेगा। इससे शहरी विकास की योजनाओं और सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए विचार सामने आने की उम्मीद है।नेशनल अर्बन कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब देश में शहरों को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श भविष्य की शहरी विकास नीतियों और नागरिक सेवाओं में सुधार की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।