जाजपुर। ओडिशा के जाजपुर जिले से वर्ष 2020 में लापता हुई नाबालिग लड़की पिहू के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। जाजपुर के सांसद रवींद्र नारायण बेहरा ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से इस मामले की स्वतंत्र और समय-सीमा के भीतर क्राइम ब्रांच जांच कराने का अनुरोध किया है। सांसद ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की शुरुआती जांच में कथित लापरवाही की भी जांच कराने और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।

पिहू के लापता होने की घटना को कई साल बीत चुके हैं, लेकिन उसका अब तक पता नहीं चल पाया है। ऐसे में सांसद की ओर से मुख्यमंत्री से की गई अपील ने मामले में फिर से जांच और जवाबदेही की मांग को सामने ला दिया है।

9 अगस्त 2020 को लापता हुई थी पिहू

सांसद के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के अनुसार, पिहू 9 अगस्त 2020 को जाजपुर जिले के बिंझारपुर पुलिस थाना क्षेत्र के मधुसूदनपुर इलाके से लापता हुई थी। परिवार के मुताबिक, बच्ची के गायब होने के बाद उन्होंने तत्काल पुलिस से संपर्क किया और उसकी तलाश शुरू करने की अपील की थी।

हालांकि, परिवार का आरोप है कि शुरुआती चरण में पुलिस की ओर से मामले को लेकर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। सांसद ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इन्हीं आरोपों का उल्लेख करते हुए मामले की जांच की प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की है।

पिहू के परिवार के लिए यह मामला केवल एक गुमशुदगी की घटना नहीं है, बल्कि वर्षों से अपने बच्चे की तलाश और उसके बारे में किसी ठोस जानकारी का इंतजार करने का दर्द है।

14 अगस्त को दर्ज हुआ मामला

पत्र में बताया गया है कि पिहू के लापता होने के पांच दिन बाद, 14 अगस्त 2020 को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह धारा किसी व्यक्ति को उसके अभिभावक की अभिरक्षा से ले जाने या बहला-फुसलाकर ले जाने से संबंधित अपराध के लिए लागू की जाती थी।

मामला दर्ज होने के बाद जांच आगे बढ़ी, लेकिन पिहू का पता नहीं चल सका। सांसद के अनुसार, बच्ची की मां मोनालिसा नायक ने पुलिस जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मां ने लगाए जांच में खामियों के आरोप

रवींद्र नारायण बेहरा ने अपने पत्र में पिहू की मां के उन आरोपों का जिक्र किया है, जिनमें उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन से बार-बार संपर्क करने के बावजूद जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं होने की बात कही है।

परिवार का आरोप है कि बच्ची की तलाश के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन जांच में ऐसी ठोस प्रगति नहीं हुई जिससे पिहू का पता लगाया जा सके। परिवार की ओर से उठाए गए सवालों के मद्देनजर सांसद ने अब मामले को राज्य की क्राइम ब्रांच को सौंपने की मांग की है।

हालांकि, जांच में कथित खामियों और अधिकारियों की भूमिका से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सांसद ने मांगी समय-सीमा तय जांच

सांसद बेहरा ने मुख्यमंत्री से केवल जांच एजेंसी बदलने की मांग नहीं की है, बल्कि उन्होंने जांच को समय-सीमा के भीतर पूरा करने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय से लंबित मामले में अब एक केंद्रित और स्वतंत्र जांच जरूरी है।

उन्होंने शुरुआती जांच के दौरान हुई कथित कमियों की भी समीक्षा कराने की मांग की है। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो सांसद ने उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।

इस मांग का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि पिहू के गायब होने के शुरुआती दिनों में पुलिस ने किन कदमों को उठाया था और क्या सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।

परिवार को अब भी जवाब का इंतजार

पिहू के लापता होने के वर्षों बाद भी उसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाना परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता है। बच्ची की मां लगातार उसके बारे में जानकारी हासिल करने और जांच में तेजी लाने की मांग करती रही हैं।

सांसद द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने के बाद अब निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर हैं। यदि सरकार क्राइम ब्रांच को स्वतंत्र जांच का आदेश देती है, तो जांच एजेंसी को पुराने रिकॉर्ड, पुलिस की कार्रवाई, संभावित सुराग और पहले की जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी की नए सिरे से समीक्षा करनी होगी।

पुराने रिकॉर्ड की भी होगी समीक्षा की जरूरत

नई जांच की स्थिति में पिहू के लापता होने के समय दर्ज केस, पुलिस डायरी, जांच अधिकारियों की रिपोर्ट, संभावित प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ और अब तक मिले सुरागों की दोबारा जांच महत्वपूर्ण होगी।

इसके अलावा, परिवार की ओर से पहले दिए गए बयानों और शिकायतों की भी समीक्षा की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि जांच के शुरुआती चरण में कोई महत्वपूर्ण सुराग नजरअंदाज तो नहीं हुआ था।

फिलहाल जाजपुर की इस पुरानी गुमशुदगी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सांसद रवींद्र नारायण बेहरा की मांग के बाद परिवार को उम्मीद है कि सरकार मामले की जांच को नए सिरे से आगे बढ़ाएगी और पिहू के बारे में लंबे समय से अनुत्तरित सवालों का जवाब तलाशने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

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