भुवनेश्वर: ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की जमीन को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। राज्य के कानून मंत्री और भाजपा नेता पृथ्वीराज हरिचंदन ने उन आरोपों का खंडन किया है, जिनमें भगवान जगन्नाथ की जमीन उनके या उनके परिवार के नाम पर दर्ज होने को लेकर सवाल उठाए गए थे। हरिचंदन ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि भगवान जगन्नाथ की जमीन का एक इंच हिस्सा भी उनके नाम पर पंजीकृत है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य सरकार ने इसी महीने श्री जगन्नाथ मंदिर भूमि प्रबंधन नियम 2026 को मंजूरी दी है।

कांग्रेस नेता के आरोपों पर दिया जवाब

हरिचंदन का यह बयान पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पंचानन कानूनगो की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में आया है। कानूनगो ने कानून मंत्री से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि क्या भगवान जगन्नाथ या श्री जगन्नाथ मंदिर से संबंधित कोई जमीन उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर दर्ज है।

हरिचंदन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के दावों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने इसे लेकर खुली चुनौती दी कि यदि आरोप लगाने वाले लोग अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश करते हैं और मंदिर की जमीन का एक इंच हिस्सा भी उनके नाम पर साबित होता है तो वह सार्वजनिक जीवन और राजनीति से हट जाएंगे।

आरोप साबित करने की दी चुनौती

कानून मंत्री ने कहा कि आरोप लगाना आसान है, लेकिन आरोपों के समर्थन में प्रमाण होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेता के दावे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े विषय को लेकर गलत जानकारी नहीं फैलाई जानी चाहिए।

हरिचंदन ने अपनी ओर से आरोपों को पूरी तरह अस्वीकार किया है। हालांकि कांग्रेस नेता द्वारा उठाए गए सवाल और मंत्री का जवाब राजनीतिक दावे-प्रतिदावे हैं। किसी विशेष जमीन के स्वामित्व की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित भूमि अभिलेखों और मंदिर प्रशासन के रिकॉर्ड से ही की जा सकती है।

हरिचंदन के 2024 के चुनावी हलफनामे में उनके नाम पर 8.230 एकड़ कृषि भूमि घोषित की गई थी। हलफनामे में गैर-कृषि भूमि, व्यावसायिक भवन और आवासीय भवन की श्रेणियों में कोई संपत्ति घोषित नहीं की गई थी। यह चुनावी हलफनामा स्वयं उम्मीदवार द्वारा घोषित संपत्ति का रिकॉर्ड है और अपने आप में मौजूदा विवादित दावे की अंतिम जांच नहीं है।

जगन्नाथ मंदिर को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता का जिक्र

हरिचंदन ने कहा कि वह और राज्य सरकार भगवान जगन्नाथ के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में और बेहतर तरीके से विकसित करने की सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।

कानून मंत्री हाल के दिनों में मंदिर से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर बैठकों में भी शामिल रहे हैं। 18 सितंबर को उन्होंने महाप्रसाद तैयार करने के लिए जलाऊ लकड़ी की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सुआरा निजोग के पदाधिकारियों के साथ चर्चा की थी। बैठक में सरकारी और श्री जगन्नाथ मंदिर की जमीन पर नए वन विकसित करने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार हुआ था।

गलत जानकारी फैलाने का लगाया आरोप

हरिचंदन ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से श्री जगन्नाथ मंदिर और उसकी संपत्तियों को लेकर किए जा रहे प्रयासों के बारे में कुछ लोग जानबूझकर गलत जानकारी फैला रहे हैं।

उन्होंने पंचानन कानूनगो की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ से संबंधित विषय पर तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर ही बात होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता के आरोपों और मंत्री के जवाब के बाद अब जमीन के रिकॉर्ड इस राजनीतिक विवाद का महत्वपूर्ण पहलू बन गए हैं।

मंदिर की जमीन के लिए आए नए नियम

यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ओडिशा सरकार ने सितंबर 2026 में श्री जगन्नाथ मंदिर की जमीन के प्रबंधन के लिए नए नियमों को मंजूरी दी है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत ‘श्री जगन्नाथ मंदिर भूमि प्रबंधन नियम 2026’ का उद्देश्य मंदिर की जमीन के प्रबंधन और निपटारे में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाना बताया गया है।

ये नियम श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत बनाए गए हैं। नए नियमों ने 2003 की यूनिफॉर्म पॉलिसी और 2019 की संशोधित यूनिफॉर्म पॉलिसी का स्थान लिया है।

मंदिर की संपत्तियों का मामला संवेदनशील

पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर ओडिशा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर के नाम पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में जमीन होने के कारण उसके प्रबंधन, रिकॉर्ड और निपटारे से जुड़े मुद्दे समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं।

इसी कारण मंदिर की जमीन से संबंधित किसी राजनीतिक नेता पर लगाया गया आरोप भी तुरंत राजनीतिक मुद्दा बन जाता है।

मौजूदा मामले में कांग्रेस नेता ने सीधे कानून मंत्री और उनके परिवार को लेकर सवाल किया है, जबकि हरिचंदन ने आरोप को नकारते हुए प्रमाण पेश करने की चुनौती दी है।

विधानसभा सत्र के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद

ओडिशा विधानसभा का मानसून सत्र भी मंगलवार से शुरू हुआ है। सत्र 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा और इसमें नौ कार्य दिवस निर्धारित हैं। विपक्ष ने खनन कानून में संशोधन, स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों, महंगाई, महानदी विवाद और कानून-व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की है।

ऐसे समय में जगन्नाथ मंदिर की जमीन से जुड़ा आरोप सत्ता पक्ष और कांग्रेस के बीच एक और राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।

जमीन के दस्तावेजों पर टिकी बहस

फिलहाल इस विवाद में पंचानन कानूनगो की ओर से सवाल और पृथ्वीराज हरिचंदन की ओर से उसका खंडन सामने आया है। मंत्री ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोप को साबित करने की चुनौती देते हुए राजनीति छोड़ने तक की बात कही है।

अब इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण आधार आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड होंगे। यदि किसी विशिष्ट जमीन, खाता या प्लॉट को लेकर आरोप लगाया जाता है तो उसका सत्यापन राजस्व रिकॉर्ड और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर किया जा सकता है।

हरिचंदन ने अपनी तरफ से स्पष्ट किया है कि भगवान जगन्नाथ की जमीन का एक इंच हिस्सा भी उनके नाम पर साबित होने पर वह राजनीति छोड़ देंगे। दूसरी ओर कांग्रेस नेता के सवाल के बाद यह मुद्दा ओडिशा की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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