जगतसिंहपुर। ओडिशा विजिलेंस ने सरकारी धन के कथित गबन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जगतसिंहपुर जिले के टर्टोल ब्लॉक कार्यालय के दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। दोनों अधिकारियों पर 3 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी फंड के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं में शामिल होने का आरोप है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान टर्टोल ब्लॉक के पूर्व एसआरए (SRA) भंजा किशोर बेहरा और पूर्व पीईओ (PEO) प्रदीप्त कुमार मल्लिक के रूप में हुई है। प्रदीप्त कुमार मल्लिक अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विजिलेंस ने यह कार्रवाई 3,02,95,000 रुपये के कथित सरकारी फंड गबन मामले में की है।

विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच के दौरान टर्टोल ब्लॉक कार्यालय में लंबे समय तक चली कथित वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। जांच में वर्ष 2011-12 से 2021-22 तक के वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की गई। इस दौरान अधिकारियों को एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी के संकेत मिले।

जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित गड़बड़ी सरकारी वेतन भुगतान और उससे जुड़े दस्तावेजों में की गई हेराफेरी से जुड़ी है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने सरकारी सैलरी रजिस्टर और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड में बदलाव किए और फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन का गलत तरीके से इस्तेमाल किया।

विजिलेंस ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि अधिकारियों ने स्वीकृत बजट से अधिक राशि के वेतन बिल तैयार किए। आरोप है कि बढ़ा-चढ़ाकर तैयार किए गए और कथित रूप से फर्जी सैलरी बिलों को जमा कर सरकारी खजाने से राशि निकाली गई।

जांच के दौरान टर्टोल ब्लॉक के पूर्व एईई (AEE) स्वर्गीय राजदीप हंसदा का नाम भी मामले में सामने आया है। विजिलेंस अब इस मामले में सभी संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।

विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसी आधार पर वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अन्य प्रमाणों की जांच की गई।

आरोप है कि यह पूरा मामला कई वर्षों तक चलता रहा और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित घोटाले में और कितने लोग शामिल थे और सरकारी धन का उपयोग किस तरह किया गया।

गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने आगे की जांच शुरू कर दी है। आरोपियों से पूछताछ कर कथित वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

सरकारी विभागों में वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऑडिट और जांच की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी धन से जुड़ी अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोका जा सके।

ओडिशा विजिलेंस लगातार भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर रही है। इस मामले में भी एजेंसी ने लंबी जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कदम उठाया है।

स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं और विभागीय कार्यों के लिए जारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में गड़बड़ी सामने आने से न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, बल्कि आम जनता के हित भी प्रभावित होते हैं।

फिलहाल टर्टोल ब्लॉक फंड गबन मामले में जांच जारी है। विजिलेंस आगे की कार्रवाई के लिए अन्य संभावित आरोपियों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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