राउरकेला। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में बढ़ती जरूरतों को देखते हुए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी राउरकेला (NIT राउरकेला) के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है। संस्थान के रिसर्चर्स ने हाइब्रिड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम तैयार किया है, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी पर अचानक पड़ने वाले दबाव को कम करना है।
इस तकनीक को पेटेंट भी मिल चुका है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह सिस्टम इलेक्ट्रिक वाहनों में तेज एक्सेलेरेशन, अचानक ब्रेक लगाने और बार-बार स्पीड बदलने जैसी परिस्थितियों में बैटरी की कार्यक्षमता और जीवनकाल को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
कम वोल्टेज वाले EV के लिए तैयार की गई तकनीक
NIT राउरकेला द्वारा विकसित यह हाइब्रिड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विशेष रूप से 24V से 60V डायरेक्ट करंट (DC) रेंज में काम करने वाले कम वोल्टेज इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बनाया गया है।
इस तकनीक का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक स्कूटर, इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा, कार्गो ट्राइसाइकिल और कैंपस या औद्योगिक उपयोग वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में किया जा सकता है।
कम वोल्टेज वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी पर अचानक अधिक लोड पड़ने की समस्या आम होती है। नई तकनीक इसी चुनौती को कम करने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
बैटरी पर अचानक दबाव को कम करेगा सिस्टम
इलेक्ट्रिक वाहनों में तेज गति पकड़ने या अचानक रुकने के दौरान बैटरी को तेजी से ऊर्जा उपलब्ध करानी पड़ती है। इससे बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और लंबे समय में उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
NIT राउरकेला के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया हाइब्रिड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम ऐसे समय में ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाने का काम करेगा।
यह सिस्टम बैटरी और अन्य ऊर्जा भंडारण माध्यमों के बीच ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करता है, जिससे बैटरी पर अचानक आने वाला भार कम हो जाता है।
मोनालिसा पटनायक के नेतृत्व में हुआ विकास
इस तकनीक को NIT राउरकेला के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर मोनालिसा पटनायक ने रिसर्चर्स प्रद्युम्न कुमार बेहरा और करण गुप्ता के साथ मिलकर विकसित किया है।
रिसर्च टीम ने इलेक्ट्रिक वाहनों की मौजूदा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस सिस्टम को डिजाइन किया है।
शोधकर्ताओं का उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना था, जो कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में भी बेहतर प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता उपलब्ध करा सके।
EV उद्योग के लिए उपयोगी साबित हो सकती है तकनीक
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। खासकर दोपहिया वाहन, ई-रिक्शा और छोटे व्यावसायिक वाहनों में EV की मांग लगातार बढ़ रही है।
ऐसे वाहनों में बैटरी की क्षमता, चार्जिंग समय और जीवनकाल सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हैं। NIT राउरकेला की यह तकनीक इन चुनौतियों को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।
बेहतर ऊर्जा प्रबंधन से वाहनों की परफॉर्मेंस बढ़ सकती है और बैटरी की उम्र भी लंबी हो सकती है।
कंपनियों के साथ काम करने की तैयारी
रिसर्च टीम अब इस तकनीक को उद्योग तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके लिए EV निर्माता कंपनियों, पावरट्रेन सिस्टम इंटीग्रेटर्स, फ्लीट ऑपरेटर्स और EV रेट्रोफिट स्टार्टअप्स के साथ सहयोग करने की तैयारी की जा रही है।
टीम का उद्देश्य है कि इस तकनीक को वास्तविक वाहनों में इस्तेमाल के लिए विकसित किया जाए और इसका व्यावसायिक उपयोग बढ़ाया जा सके।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही हैं। ऐसे में EV की बैटरी तकनीक और ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली में सुधार बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
NIT राउरकेला की यह उपलब्धि देश में स्वदेशी EV तकनीक के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भविष्य में बढ़ सकती है तकनीक की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ऐसी तकनीकों की मांग भी बढ़ेगी, जो बैटरी की क्षमता और विश्वसनीयता को बेहतर बना सकें।
हाइब्रिड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम जैसी तकनीकें न केवल वाहनों की दक्षता बढ़ा सकती हैं, बल्कि EV उपयोगकर्ताओं के अनुभव को भी बेहतर बना सकती हैं।
NIT राउरकेला के शोधकर्ताओं की यह पहल भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। पेटेंट हासिल करने के बाद अब टीम का लक्ष्य इस तकनीक को उद्योग तक पहुंचाना और इसे बड़े स्तर पर उपयोग में लाना है।