पुरी : पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में गर्भगृह के अंदर चूहों और कॉकरोच की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए मंदिर प्रशासन ने कदम उठाने का फैसला किया है। 12वीं सदी के इस ऐतिहासिक मंदिर में किसी भी जीव-जंतु या कीड़े-मकोड़ों को नुकसान न पहुंचाने के निर्देशों के बावजूद अब पारंपरिक कीट नियंत्रण तरीकों का इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने इस गंभीर समस्या को लेकर बैठक की है। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर परिसर में चूहों की समस्या नई नहीं है, लेकिन हाल के समय में इनकी संख्या बढ़ने से चिंता बढ़ गई है।
गर्भगृह में बढ़ी चूहों और कॉकरोच की समस्या
SJTA के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने बताया कि प्राचीन जगन्नाथ मंदिर में चूहों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान यह समस्या और बढ़ गई थी, क्योंकि उस समय मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम हो गई थी। लोगों की आवाजाही कम होने के कारण चूहों की संख्या में वृद्धि देखने को मिली।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में भी चूहों और अन्य कीटों से निपटने के लिए पारंपरिक कीट नियंत्रण उपाय अपनाए गए थे, लेकिन कुछ समय बाद समस्या दोबारा बढ़ गई।
फिर अपनाए जाएंगे पारंपरिक उपाय
मंदिर प्रशासन ने अब एक बार फिर पारंपरिक तरीकों से कीट नियंत्रण करने का निर्णय लिया है।
अधिकारियों के अनुसार, मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए ऐसे उपाय अपनाए जाएंगे, जिनसे मंदिर की पवित्रता और संरचना को नुकसान न पहुंचे।
प्रशासन का उद्देश्य है कि गर्भगृह और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को सुरक्षित रखा जाए और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े नियमों का भी पालन हो।
जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचाने के निर्देश
पुरी जगन्नाथ मंदिर में किसी भी जानवर या कीड़े-मकोड़ों को मारने को लेकर स्पष्ट निर्देश हैं।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि समस्या का समाधान इस तरह किया जाएगा जिससे जीवों को नुकसान पहुंचाने से बचा जा सके।
इसी कारण आधुनिक तरीकों की जगह पारंपरिक उपायों पर विचार किया जा रहा है।
ASI से ली गई सलाह
पुरी के कलेक्टर दिब्य ज्योति परिडा, जो श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के उप-मुख्य प्रशासक भी हैं, ने बताया कि इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से भी सलाह ली गई है।
क्योंकि मंदिर एक प्राचीन और संरक्षित धरोहर है, इसलिए किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले विशेषज्ञों की राय लेना जरूरी माना जा रहा है।
ASI मंदिर की संरचना और संरक्षण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मंदिर की पवित्रता और संरक्षण बड़ी चुनौती
जगन्नाथ मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में मंदिर की स्वच्छता, सुरक्षा और पवित्रता बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
चूहों और कॉकरोच जैसी समस्या न केवल सफाई से जुड़ी है, बल्कि मंदिर की प्राचीन संरचना और धार्मिक सामग्री की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है।
पहले भी सामने आ चुकी है समस्या
अधिकारियों के अनुसार, मंदिर में चूहों की समस्या समय-समय पर सामने आती रही है।
पुराने भवनों और बड़ी संरचनाओं वाले धार्मिक स्थलों में इस तरह की समस्याएं कई बार देखने को मिलती हैं। मंदिर प्रशासन नियमित रूप से सफाई और रखरखाव के उपाय करता है।
हालांकि, गर्भगृह जैसे संवेदनशील स्थानों में विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है।
श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला
जगन्नाथ मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए यहां किसी भी तरह की व्यवस्था को लागू करते समय धार्मिक परंपराओं और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखा जाता है।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि चूहों और कॉकरोच की समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा, ताकि मंदिर की पवित्रता और व्यवस्था बनी रहे।
फिलहाल SJTA की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। मंदिर प्रशासन की कोशिश है कि समस्या का समाधान प्रभावी तरीके से हो और प्राचीन धरोहर की गरिमा भी कायम रहे।