भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को संशोधित और त्रुटि रहित पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की तैयारी तेज कर दी है। स्कूल और मास एजुकेशन विभाग ने किताबों की गहन समीक्षा के बाद 55 पुस्तकों में आवश्यक सुधार का काम पूरा कर लिया है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभाग ने पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा प्रक्रिया शुरू की थी। इसका उद्देश्य किताबों में मौजूद गलतियों को दूर करना और छात्रों को बेहतर गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है। विभाग का कहना है कि संशोधन के बाद पुस्तकों की कई स्तरों पर जांच की गई है।

जानकारी के अनुसार, 27 से अधिक भाषा विशेषज्ञों ने संशोधित पुस्तकों की कई बार समीक्षा की। विशेषज्ञों ने किताबों के प्रत्येक पेज पर मौजूद वाक्यों, शब्दों और सामग्री की जांच की, ताकि किसी भी तरह की भाषाई या तथ्यात्मक त्रुटि को दूर किया जा सके।

स्कूल और मास एजुकेशन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, किताबों के संशोधन के बाद उनका डीटीपी (डेस्कटॉप पब्लिशिंग) कार्य पूरा हो चुका है। अब ये पुस्तकें छपाई के लिए तैयार हैं। विभाग को उम्मीद है कि सभी आठ कक्षाओं की संशोधित किताबें अगले दो-तीन दिनों में छपकर विद्यार्थियों तक पहुंचाई जा सकेंगी।

टीचर एजुकेशन डायरेक्टरेट और स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के अधिकारियों ने बताया कि पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष सावधानी बरती गई है। किताबों को अंतिम रूप देने से पहले विशेषज्ञों की टीम ने सामग्री की जांच की।

स्कूल और मास एजुकेशन विभाग के सचिव एन. थिरुमाला नाइक ने समीक्षा प्रक्रिया की निगरानी खुद की। अधिकारियों के अनुसार, सचिव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि संशोधित पुस्तकों में कोई बड़ी गलती या कमी न रह जाए।

पाठ्यपुस्तकों में सुधार की प्रक्रिया इसलिए शुरू की गई थी क्योंकि पहले प्रकाशित किताबों में कुछ त्रुटियों को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञों की मदद से पुस्तकों की समीक्षा कराने का फैसला लिया।

विभाग का कहना है कि छात्रों को सही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। किताबें बच्चों की शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होती हैं, इसलिए उनमें किसी भी प्रकार की गलती से बचना जरूरी है।

हालांकि, संशोधित किताबों की छपाई से पहले विभाग के सामने फंड की चुनौती भी बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, पुस्तकों की छपाई और वितरण के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

विभाग इस बात पर काम कर रहा है कि समय पर किताबों की छपाई और वितरण पूरा हो सके। सरकार की कोशिश है कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र के दौरान बिना देरी के संशोधित पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में सही जानकारी और भाषा की शुद्धता छात्रों के सीखने की प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव डालती है। इसलिए किताबों की नियमित समीक्षा और सुधार जरूरी है।

ओडिशा सरकार की इस पहल को शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। संशोधित किताबों के माध्यम से छात्रों को बेहतर अध्ययन सामग्री मिलने की उम्मीद है।

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छपाई पूरी होने के बाद स्कूलों तक किताबें पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं।

फिलहाल संशोधित पाठ्यपुस्तकों की छपाई अंतिम चरण में है। सरकार और शिक्षा विभाग की नजर अब इस बात पर है कि किताबें तय समय में स्कूलों तक पहुंच जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

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