जाजपुर। ओडिशा के जाजपुर जिले में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच मानवीय संकट की एक तस्वीर सामने आई है। बाढ़ से घिरे एक घर की छत पर 60 वर्षीय व्यक्ति का शव करीब 18 घंटे तक पड़ा रहा। बढ़ते पानी के कारण परिवार के सदस्य शव को घर से बाहर नहीं निकाल सके। परिवार का आरोप है कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई।
यह घटना जाजपुर जिले की बारी पंचायत के चिंतासाही इलाके की बताई जा रही है। क्षेत्र में ब्राह्मणी और खारासरोता नदियों में आई बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई परिवार पिछले पांच दिनों से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों के सामने खाने-पीने की सामग्री, सुरक्षित स्थान और आवागमन के साथ-साथ मृतकों के अंतिम संस्कार जैसी गंभीर समस्याएं भी खड़ी हो गई हैं।
छत पर परिवार के साथ थे हृषिकेश मल्लिक
मृतक की पहचान हृषिकेश मल्लिक के रूप में हुई है। बताया गया कि बुधवार शाम करीब 4:30 बजे उन्होंने बाढ़ से घिरे अपने घर की छत पर परिवार के साथ रहते हुए दम तोड़ दिया। उस समय घर का निचला हिस्सा पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब चुका था। आसपास के इलाकों में भी पानी तेजी से बढ़ रहा था और गांव के कुछ हिस्सों में पानी कमर तक पहुंच गया था।
परिवार के लिए सबसे बड़ी मुश्किल उस समय खड़ी हुई, जब हृषिकेश मल्लिक के निधन के बाद उनके शव को छत से नीचे लाना संभव नहीं रहा। घर के निचले हिस्से में पानी भरा होने के कारण परिवार के सदस्य जोखिम उठाकर शव को नीचे नहीं ले जा सके। इसके चलते शव को रातभर घर की छत पर ही रखना पड़ा।
बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह करीब 10 बजे तक शव छत पर पड़ा रहा। करीब 18 घंटे तक शव के अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करने की इस घटना ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पांच दिनों से बाढ़ की चपेट में गांव
चिंतासाही और आसपास के इलाकों में पिछले कई दिनों से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। ब्राह्मणी और खारासरोता नदियों के जलस्तर में वृद्धि के बाद गांवों में पानी घुस गया। कई घर पानी से घिरे हुए हैं और लोगों को सामान्य आवाजाही में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई परिवार सुरक्षित स्थानों पर जाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग अपने घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं। बाढ़ के कारण सड़क मार्ग प्रभावित होने से जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
प्रशासन से मदद नहीं मिलने का आरोप
हृषिकेश मल्लिक के परिवार ने आरोप लगाया कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन को घटना की जानकारी दी और शव को घर से बाहर निकालने के लिए मदद मांगी। परिवार के अनुसार, मृतक के भतीजे अनिल मल्लिक ने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) को तीन बार फोन किया, लेकिन कथित तौर पर फोन का जवाब नहीं मिला।
परिवार का कहना है कि यदि समय पर प्रशासन या राहत दल की सहायता मिल जाती तो शव को सुरक्षित तरीके से घर से बाहर निकालकर अंतिम संस्कार किया जा सकता था। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में तत्काल क्या कार्रवाई की गई और फोन नहीं उठने के आरोपों पर अधिकारियों का क्या पक्ष है, यह स्पष्ट होना बाकी है।
बाढ़ ने बढ़ाई मुश्किलें
बाढ़ की स्थिति में आम तौर पर राहत और बचाव कार्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की होती है। जब सड़कें और संपर्क मार्ग पानी में डूब जाते हैं तो लोगों को भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के साथ शवों को बाहर निकालना भी कठिन हो जाता है।
चिंतासाही में सामने आई घटना इसी चुनौती को उजागर करती है। एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार को शव के साथ घंटों तक छत पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। अंतिम संस्कार में देरी ने परिवार की परेशानी और बढ़ा दी।
राहत और बचाव व्यवस्था पर सवाल
घटना सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों का कहना है कि लंबे समय तक पानी से घिरे रहने के कारण उनकी परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से समय पर राहत सामग्री, सुरक्षित निकासी और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
विशेष रूप से बुजुर्गों, बीमार लोगों और अन्य जरूरतमंदों के लिए बाढ़ के दौरान तत्काल सहायता की आवश्यकता होती है। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में शव को सुरक्षित तरीके से निकालकर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना भी प्रशासनिक राहत कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
फिलहाल जाजपुर के चिंतासाही इलाके में बाढ़ की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ब्राह्मणी और खारासरोता नदियों के जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। हृषिकेश मल्लिक की मौत और उनके शव के करीब 18 घंटे तक छत पर पड़े रहने की घटना ने बाढ़ के दौरान सामने आने वाली जमीनी चुनौतियों को उजागर कर दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन प्रभावित परिवारों तक कितनी तेजी से राहत और बचाव सहायता पहुंचाता है तथा परिवार द्वारा लगाए गए मदद नहीं मिलने के आरोपों पर क्या कार्रवाई की जाती है।