चक्रवात अर्णब से भारी तबाही, सांसद सप्तगिरी उलाका ने पीएम मोदी से मांगी विशेष मदद
भुवनेश्वर। ओडिशा में चक्रवात 'अर्णब' और उसके बाद हुई भारी बारिश तथा अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के लिए केंद्रीय सहायता की मांग तेज हो गई है। कोरापुट लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दक्षिण ओडिशा के कोरापुट और रायगडा जिलों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दोनों जिलों में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का व्यापक आकलन कराने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज घोषित करने की मांग की है। सांसद का कहना है कि चक्रवात के बाद हुई मूसलाधार बारिश, बाढ़, जलभराव और भूस्खलन के खतरे ने पहाड़ी तथा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। ग्रामीण सड़कों, कृषि गतिविधियों और आवश्यक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है।
सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि चक्रवात अर्णब का असर दक्षिण ओडिशा के कई इलाकों में देखने को मिला है। विशेष रूप से कोरापुट और रायगडा जिलों के दूरदराज तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
उनके अनुसार, लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी। पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर आवागमन बाधित हुआ। इन परिस्थितियों में स्थानीय लोगों को दैनिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कोरापुट और रायगडा जिले आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार खेती, वनोपज और छोटे व्यवसायों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा से कृषि भूमि तथा ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचने का प्रभाव लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है।
सांसद ने कहा कि आपदा से प्रभावित परिवारों को केवल तत्काल राहत उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करने और लोगों की आजीविका बहाल करने के लिए दीर्घकालीन उपायों की आवश्यकता है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि दोनों जिलों में नुकसान का वैज्ञानिक और व्यापक सर्वेक्षण कराया जाए। इसके आधार पर प्रभावित परिवारों और क्षेत्रों के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
चक्रवात अर्णब के प्रभाव से दक्षिण ओडिशा के विभिन्न जिलों में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही गंजाम, गजपति, कोरापुट, रायगडा और मलकानगिरी सहित कई जिलों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी।
28 अक्टूबर को सामने आए बारिश के आंकड़ों के अनुसार, कोरापुट जिले के पट्टांगी क्षेत्र में 188 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। वहीं सिमिलीगुड़ा में 143.1 मिलीमीटर बारिश हुई। लगातार हुई वर्षा से कई निचले क्षेत्रों में जलभराव और सड़क संपर्क प्रभावित होने की समस्या सामने आई।
ओडिशा सरकार ने चक्रवात के खतरे को देखते हुए पहले से राहत और बचाव की तैयारियां शुरू कर दी थीं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने संबंधित विभागों को सतर्क रहने और आपदा प्रभावित इलाकों में आवश्यक सेवाएं बहाल करने के निर्देश दिए थे।
सरकार ने दक्षिणी जिलों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल और अग्निशमन विभाग की टीमों को तैनात किया। संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया।
राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों के लिए शुरुआती राहत और तैयारियों के उद्देश्य से 19 करोड़ रुपये भी जारी किए थे। इसमें गंजाम जिले को पांच करोड़ रुपये और कोरापुट तथा रायगडा सहित सात अन्य जिलों को दो-दो करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
हालांकि सांसद सप्तगिरी उलाका का कहना है कि आपदा से हुए नुकसान की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण सड़कों, सार्वजनिक सुविधाओं और कृषि आधारित आजीविका की बहाली पर ध्यान देने की मांग की है।
कोरापुट और रायगडा के अनेक गांव पहाड़ी इलाकों में स्थित हैं। ऐसे क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने से स्वास्थ्य सेवाओं, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।
यदि सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं या पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन होता है, तो राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाई हो सकती है। इसलिए सांसद ने ग्रामीण संपर्क व्यवस्था बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों को भी नुकसान होने की आशंका है। खेतों में जलभराव होने और फसलें गिरने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से धान और अन्य मौसमी फसलों की स्थिति का आकलन करना आवश्यक होगा।
राज्य सरकार ने भी चक्रवात के बाद कृषि क्षेत्र में संभावित नुकसान की समीक्षा करने की बात कही है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अधिकारियों को फसलों और मकानों को हुए नुकसान के आधार पर प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
सांसद उलाका की मांग है कि केंद्र सरकार नुकसान के आकलन के लिए विशेष टीम भेजे। ऐसी टीम ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों, कृषि भूमि, मकानों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की स्थिति का निरीक्षण कर सकती है।
उन्होंने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग भी की है। इसका उद्देश्य केवल आपदा के दौरान राहत उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों को दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता देना है।
इस बीच केंद्र सरकार ने भी चक्रवात प्रभावित राज्यों को सहायता देने का आश्वासन दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 अक्टूबर को ओडिशा सहित प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की थी।
गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्र सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। इसके अलावा नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजने की घोषणा की गई है। इन टीमों की रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता का मूल्यांकन किया जा सकेगा।
उधर, चक्रवात के कारण परिवहन और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का असर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों पर भी पड़ा है। सांसद सप्तगिरी उलाका ने इससे पहले ओडिशा लोक सेवा आयोग से जयपुर केंद्र पर आयोजित होने वाली राज्य सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की तारीख बदलने की मांग की थी।
उन्होंने आयोग को लिखे पत्र में कहा था कि चक्रवात के कारण सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति और सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुए हैं। ऐसी स्थिति में कोरापुट, रायगडा, मलकानगिरी और नबरंगपुर जिलों के अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।
सांसद ने परीक्षा स्थगित करने या प्रभावित केंद्र के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का आग्रह किया था, ताकि परीक्षार्थियों को प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान न उठाना पड़े।
अब प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्रीय सहायता की मांग करने से सांसद ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास किया है।
कोरापुट और रायगडा जैसे पहाड़ी जिलों में आपदा के बाद पुनर्वास कार्यों की आवश्यकता केवल मकानों की मरम्मत तक सीमित नहीं होती। ग्रामीण संपर्क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि गतिविधियों की बहाली भी महत्वपूर्ण होती है।
इसके अलावा भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए मजबूत सड़क निर्माण, जल निकासी व्यवस्था और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों की निगरानी जैसे उपायों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
फिलहाल ओडिशा सरकार राहत और आवश्यक सेवाओं की बहाली में जुटी है। केंद्र सरकार ने भी प्रभावित राज्यों को सहयोग देने और नुकसान का आकलन कराने का आश्वासन दिया है।
ऐसे में सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका की मांग के बाद अब सभी की नजर केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली अतिरिक्त सहायता और विशेष पुनर्वास पैकेज पर है। यदि नुकसान का विस्तृत आकलन कर योजनाबद्ध तरीके से पुनर्निर्माण किया जाता है, तो प्रभावित ग्रामीण परिवारों को अपनी आजीविका और सामान्य जीवन दोबारा स्थापित करने में मदद मिल सकती है।