कटक: सिंगर सौरिन भट्ट की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कटक महिला पुलिस स्टेशन ने उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) को लागू कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत कटक महिला पुलिस ने कोलकाता के बालीगंज पुलिस स्टेशन से संपर्क किया है और ईमेल के जरिए वारंट के साथ अदालत के निर्देश भेजे हैं।
पुलिस ने बालीगंज थाने से सौरिन भट्ट के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को लागू करने में सहयोग मांगा है। साथ ही उन्हें गिरफ्तार कर संबंधित अदालत के सामने पेश करने की कार्रवाई करने को कहा गया है। यह कदम ओडिशा हाई कोर्ट द्वारा वारंट के अमल पर लगी रोक हटाए जाने के बाद उठाया गया है।
कोलकाता पुलिस को भेजा गया वारंट
कटक महिला पुलिस ने बालीगंज पुलिस स्टेशन को भेजे ईमेल में सौरिन भट्ट के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट और उससे संबंधित अदालती आदेश की जानकारी साझा की है।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब वारंट को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। चूंकि भट्ट का संबंध कोलकाता से बताया जा रहा है, इसलिए कटक पुलिस ने स्थानीय पुलिस से सहयोग मांगा है।
वारंट के आधार पर गिरफ्तारी और अदालत के सामने पेश करने की प्रक्रिया कानून के मुताबिक संबंधित पुलिस इकाइयों के समन्वय से की जाएगी।
हाई कोर्ट ने हटाई थी रोक
मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम तब सामने आया जब ओडिशा हाई कोर्ट ने कटक SDJM कोर्ट द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के अमल पर लगी रोक हटा दी।
बताया गया है कि हाई कोर्ट ने निचली अदालत के सामने पेश होने में बार-बार विफल रहने को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद वारंट के क्रियान्वयन पर पहले दी गई राहत समाप्त हो गई और पुलिस के लिए आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।
इसके बाद कटक महिला पुलिस स्टेशन ने वारंट लागू कराने के लिए कोलकाता पुलिस से संपर्क किया।
नवंबर 2023 में जारी हुआ था NBW
कटक की SDJM कोर्ट ने 23 नवंबर 2023 को सौरिन भट्ट के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद भट्ट ने इस आदेश को चुनौती देते हुए ओडिशा हाई कोर्ट का रुख किया था।
हाई कोर्ट ने उस समय वारंट के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए उन्हें निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। इस आदेश से उन्हें तत्काल गिरफ्तारी से अस्थायी राहत मिली थी।
हालांकि मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। अदालत में उनकी उपस्थिति से जुड़ा विषय आगे भी सुनवाई में आता रहा।
निचली अदालत में पेश नहीं होने पर नाराजगी
मामले में हाई कोर्ट की नाराजगी का प्रमुख कारण भट्ट का निचली अदालत के सामने बार-बार पेश नहीं होना बताया गया है। अदालत की ओर से पहले उन्हें संबंधित कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था।
इसके बावजूद निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बाद हाई कोर्ट ने पहले दी गई अंतरिम राहत को जारी रखने का आधार नहीं पाया और NBW के क्रियान्वयन पर लगी रोक हटा दी।
इसके बाद कटक SDJM कोर्ट द्वारा पहले से जारी गैर-जमानती वारंट दोबारा प्रभावी हो गया।
कटक और कोलकाता पुलिस के बीच समन्वय
सौरिन भट्ट के मामले में अब कटक महिला पुलिस और कोलकाता की बालीगंज पुलिस के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो गया है। कटक पुलिस की ओर से वारंट और अदालत के निर्देश भेजे जाने के बाद स्थानीय पुलिस कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।
यदि भट्ट को वारंट के तहत हिरासत में लिया जाता है तो उन्हें संबंधित अदालत के सामने पेश करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दूसरे राज्य में वारंट लागू होने की स्थिति में स्थानीय न्यायिक प्रक्रिया और ट्रांजिट से जुड़े आवश्यक कानूनी प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
फिलहाल पुलिस की ओर से वारंट को लागू कराने की कार्रवाई शुरू होने से सिंगर की कानूनी परेशानियां बढ़ गई हैं।
क्या होता है गैर-जमानती वारंट?
गैर-जमानती वारंट यानी NBW अदालत द्वारा जारी ऐसा आदेश है जिसके तहत पुलिस संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश कर सकती है। हालांकि 'गैर-जमानती' शब्द का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को किसी भी परिस्थिति में जमानत नहीं मिल सकती। जमानत पर फैसला संबंधित अदालत मामले की परिस्थितियों और कानून के आधार पर करती है।
ऐसा वारंट आमतौर पर उस स्थिति में जारी किया जा सकता है जब अदालत किसी व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कड़ा कदम जरूरी समझती है।
सौरिन भट्ट के मामले में भी कटक SDJM कोर्ट ने नवंबर 2023 में NBW जारी किया था और बाद में हाई कोर्ट से उन्हें अस्थायी राहत मिली थी।
हाई कोर्ट की राहत खत्म होने के बाद बढ़ा दबाव
हाई कोर्ट की ओर से रोक हटाए जाने के बाद अब पहले जारी वारंट को लागू कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में कटक महिला पुलिस ने बालीगंज पुलिस स्टेशन को औपचारिक रूप से इसकी जानकारी दी है।
इस घटनाक्रम के बाद सौरिन भट्ट के सामने संबंधित अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करने का दबाव बढ़ गया है।
आगे यह देखना होगा कि कोलकाता पुलिस वारंट पर क्या कार्रवाई करती है और भट्ट की ओर से अदालत में कोई नई कानूनी याचिका या राहत की मांग की जाती है या नहीं।
अदालत में पेशी पर टिकी नजर
फिलहाल पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम वारंट के क्रियान्वयन और सौरिन भट्ट की अदालत में पेशी से जुड़ा होगा। कटक महिला पुलिस ने अपनी तरफ से कोलकाता पुलिस को आवश्यक जानकारी और अदालत के निर्देश भेजकर कार्रवाई आगे बढ़ा दी है।
मामले में अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा। गैर-जमानती वारंट किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं होता, बल्कि अदालत के सामने उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।