Bhubaneswar. भुवनेश्वर। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ओडिशा के भुवनेश्वर में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रवक्ता हमीद हुसैन ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी पहले भी इस विषय को लेकर चेतावनी दे चुके हैं। हमीद हुसैन ने कहा कि राहुल गांधी का रुख सही है और कांग्रेस पहले से ही यह कहती रही है कि भारत पर अमेरिकी दबाव का असर पड़ रहा है। उन्होंने व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके कुछ प्रावधान भारत के हितों के अनुकूल नहीं रहे।
व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
AICC प्रवक्ता ने कहा कि जब व्यापार समझौता अंतिम रूप दिया गया, तब सामने आया कि इसमें कई ऐसी शर्तें थीं जो भारत के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत पहले से ही कुछ मामलों में नुकसान की स्थिति में है। हालांकि, व्यापार समझौते और उसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अलग-अलग राय रही है।
राहुल गांधी के बयान का किया समर्थन
हमीद हुसैन ने राहुल गांधी के पहले दिए गए बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार इस विषय को उठाती रही है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों में भारत के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका अपनी नीतियों को उसी दिशा में लागू करता है जैसा वहां से निर्णय लिया जाता है।
अमेरिका के साथ संबंधों पर चर्चा
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक संबंधों को लेकर समय-समय पर बातचीत होती रही है। दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। व्यापार समझौतों में शुल्क, बाजार पहुंच और अन्य आर्थिक मुद्दे प्रमुख विषय रहे हैं। इन मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच अक्सर मतभेद सामने आते रहे हैं।
कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
हमीद हुसैन के बयान के बाद एक बार फिर व्यापार समझौतों को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस लगातार मांग करती रही है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रभाव और उनकी शर्तों को लेकर स्थिति स्पष्ट करे। वहीं, सरकार की ओर से व्यापार नीतियों को लेकर अलग-अलग मौकों पर भारत के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की बात कही जाती रही है। फिलहाल भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है और आने वाले समय में यह मुद्दा चर्चा में बना रह सकता है।
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