मां बगलामुखी मंदिर के पास बरसाती नाले में बही कार, ओडिशा के 7 लोगों समेत 8 की मौत
आगर-मालवा। मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में दर्दनाक हादसा सामने आया है। नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के पास एक कार बरसाती नाले के तेज बहाव में बह गई। हादसे में कार में सवार ओडिशा के सात लोगों और वाहन चालक की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे और दो महिलाएं भी शामिल हैं। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे।
बताया जा रहा है कि ओडिशा के रहने वाले सभी सात लोग एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मध्य प्रदेश आए थे। इसी दौरान उन्होंने धार्मिक स्थलों के दर्शन का कार्यक्रम बनाया। उज्जैन से दर्शन करने के बाद परिवार नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर पहुंचा था। मंदिर दर्शन के दौरान ही उनकी कार हादसे का शिकार हो गई।
बरसाती नाले के तेज बहाव में फंसी कार
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव काफी तेज था। कार नाले के पास पहुंची तो चालक वाहन को सुरक्षित निकाल नहीं सका। देखते ही देखते कार पानी के तेज बहाव में बहने लगी। कार में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिला।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद लोगों ने प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं।
पानी के तेज बहाव के कारण बचाव अभियान में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कार और उसमें सवार लोगों की तलाश के लिए नाले के आसपास के क्षेत्र में अभियान चलाया गया।
ओडिशा के जयदेव विहार के रहने वाले थे मृतक
हादसे में जान गंवाने वाले सात लोग ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के जयदेव विहार इलाके के रहने वाले बताए गए हैं। मृतकों की पहचान शिबा प्रसाद बेहरा, कृष्णा राजवीर, सायरा सोनप्रभा, ज्ञानेंद्र बेहरा, रीतारानी बेहरा, बी साई स्वास्तिक और राधारानी बेहरा के रूप में हुई है।
इसके अलावा हादसे में कार चालक की भी मौत हुई है। चालक आगर-मालवा जिले का रहने वाला बताया गया है। इस तरह हादसे में कुल आठ लोगों की जान चली गई।
एक ही हादसे में परिवार के कई सदस्यों की मौत की खबर सामने आने के बाद मृतकों के रिश्तेदारों में मातम पसर गया। मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने ओडिशा में उनके परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू की।
बेटी की अंगूठी की रस्म में शामिल होने आए थे
जानकारी के अनुसार, परिवार अपनी बेटी की अंगूठी की रस्म में शामिल होने के लिए मध्य प्रदेश आया था। पारिवारिक कार्यक्रम के साथ ही उन्होंने उज्जैन और आसपास के धार्मिक स्थलों के दर्शन की योजना बनाई थी।
आगर-मालवा के पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी के मुताबिक, पीड़ित मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले थे। वे उज्जैन से नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर के दर्शन के लिए आए थे।
मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। इसी यात्रा के दौरान परिवार की कार बरसाती नाले की चपेट में आ गई और धार्मिक यात्रा एक बड़े हादसे में बदल गई।
अचानक बढ़े पानी ने बढ़ाई मुश्किल
बारिश के मौसम में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। पहाड़ी या ऊंचाई वाले इलाकों में हुई तेज बारिश का पानी भी कुछ ही समय में निचले इलाकों के नालों तक पहुंच जाता है। ऐसे में सामान्य दिखाई देने वाला नाला भी अचानक उफान पर आ सकता है।
नलखेड़ा में हुए इस हादसे में भी पानी के तेज बहाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि कार किन परिस्थितियों में नाले तक पहुंची, सड़क पर उस समय कितना पानी था और चालक ने किस रास्ते से वाहन निकालने का प्रयास किया, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।
हादसे के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार और उसमें मौजूद लोगों को पानी से बाहर निकालना थी। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की मदद से बचाव अभियान चलाया गया।
शवों को निकालने के बाद पहचान की प्रक्रिया
रेस्क्यू टीम ने अभियान चलाकर मृतकों के शवों को बाहर निकाला। इसके बाद उनकी पहचान और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया शुरू की गई। ओडिशा के रहने वाले मृतकों के शव उनके गृह राज्य भेजने के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक समन्वय किया जा रहा है।
एक साथ इतने लोगों की मौत होने के कारण घटना की सूचना ओडिशा प्रशासन को भी दी गई है। परिजनों से संपर्क कर उन्हें हादसे के बारे में जानकारी दी गई।
हादसे की परिस्थितियों की जांच
प्रशासन अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहा है। खास तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि कार किस रास्ते से जा रही थी और क्या नाले के आसपास उस समय आवागमन रोकने या खतरे को लेकर किसी प्रकार की चेतावनी व्यवस्था मौजूद थी।
बारिश के दौरान नदी-नालों और पुल-पुलियों पर पानी होने की स्थिति में वाहन निकालना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। पानी की गहराई कम दिखाई देने के बावजूद तेज बहाव बड़े वाहनों को भी बहा सकता है। प्रशासन की ओर से आम तौर पर ऐसी परिस्थितियों में जलभराव वाले रास्तों को पार नहीं करने की सलाह दी जाती है।
नलखेड़ा की इस घटना ने एक बार फिर बरसात के दौरान उफनते नदी-नालों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है। फिलहाल प्रशासन मृतकों के परिजनों से संपर्क और शवों को उनके गृह क्षेत्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटा है, जबकि हादसे के वास्तविक कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है।