खनिज संशोधन कानून पर BJD का विरोध, राज्यपाल से मिलकर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
भुवनेश्वर। बीजू जनता दल (BJD) ने ‘माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट एक्ट, 2026’ को लेकर विरोध जताते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की मांग की है। बुधवार को BJD के एक प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया है।
BJD नेताओं का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन से ओडिशा के संवैधानिक अधिकारों, वित्तीय हितों और खनिज संसाधनों से जुड़े राज्य के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी ने मांग की है कि इस मामले में राष्ट्रपति स्तर पर विचार किया जाए और राज्य के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के सामने अपनी चिंताएं रखते हुए कहा कि ओडिशा देश के सबसे महत्वपूर्ण खनिज संपन्न राज्यों में शामिल है। राज्य में लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, क्रोमाइट और अन्य खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं। इन खनिज संसाधनों से राज्य को लंबे समय से महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त होता रहा है।
BJD ने कहा कि खनिज संसाधन केवल आर्थिक गतिविधियों का माध्यम नहीं हैं, बल्कि राज्य के विकास और वित्तीय व्यवस्था का भी अहम आधार हैं। पार्टी का दावा है कि खदानों और खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों में किसी भी तरह का बदलाव ओडिशा के हितों पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।
पार्टी नेताओं ने ज्ञापन में कहा कि ओडिशा जैसे खनिज उत्पादक राज्यों को खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का उचित लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि यदि संशोधित कानून से राज्यों की भूमिका कमजोर होती है तो इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
BJD नेताओं ने यह भी कहा कि खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों में राज्यों की भागीदारी और अधिकारों को बनाए रखना जरूरी है। उनका कहना है कि संघीय व्यवस्था में राज्यों के हितों का संरक्षण होना चाहिए और ऐसे कानूनों पर राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वह ज्ञापन को राष्ट्रपति तक पहुंचाएं और मामले में आवश्यक हस्तक्षेप की अपील करें। BJD का कहना है कि ओडिशा के खनिज संसाधन राज्य की जनता की संपत्ति हैं और इनके उपयोग से जुड़े फैसलों में राज्य के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
ओडिशा लंबे समय से देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल रहा है। यहां मौजूद खनिज भंडार राज्य की औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खनन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
BJD ने कहा कि खनिज क्षेत्र में किसी भी तरह का नीतिगत बदलाव करते समय राज्यों की आर्थिक निर्भरता और स्थानीय हितों को ध्यान में रखना चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि खनिज संपदा से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और जनकल्याण योजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान BJD प्रतिनिधिमंडल ने संशोधन कानून को लेकर अपनी आपत्तियां विस्तार से रखीं। पार्टी ने कहा कि वह राज्य के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक मंच पर अपनी बात रखेगी।
इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। खनिज संसाधनों के अधिकार और राज्यों की भूमिका को लेकर पहले भी केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।
फिलहाल BJD ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब नजर इस बात पर होगी कि इस ज्ञापन और राज्य की आपत्तियों पर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।