अंगुल। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को अंगुल जिले में तालचेर के पास स्थित गुरुजंग गांव को ‘हेरिटेज विलेज’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की। गुरुजंग को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जन्मस्थान माना जाता है। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही गुरुजंग पंचायत को ‘मॉडल पंचायत’ के तौर पर विकसित करने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने यह घोषणा स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी के अवसर पर गुरुजंग में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा कि गांव के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसके विकास की दिशा में विशेष प्रयास किए जाएंगे।

जन्मभूमि को धरोहर स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी

गुरुजंग को हेरिटेज विलेज के रूप में विकसित करने की घोषणा के साथ ही गांव के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का यह फैसला स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्मभूमि को उनकी विरासत से जोड़ते हुए विकसित करने की योजना का हिस्सा माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुजंग की पहचान केवल एक सामान्य गांव के रूप में नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे व्यक्तित्व की जन्मभूमि है, जिन्होंने अपना जीवन समाज सेवा और आध्यात्मिक कार्यों के लिए समर्पित किया।

पंचायत को बनाया जाएगा मॉडल पंचायत

मुख्यमंत्री माझी ने गुरुजंग पंचायत को मॉडल पंचायत के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की। इसका उद्देश्य पंचायत क्षेत्र में विकास और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।

मॉडल पंचायत के रूप में विकास के तहत स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सुविधाओं को मजबूत करने, ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार लाने और पंचायत को विकास का उदाहरण बनाने पर जोर दिया जा सकता है।

सरकार की इस घोषणा से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ गांव को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की विरासत से जोड़कर विकसित करने की योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वामी लक्ष्मणानंद को बताया महान आदर्श

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन और उनके सामाजिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक महान आदर्श, आध्यात्मिक संस्था और सनातन धर्म की मार्गदर्शक शक्ति थे।

मुख्यमंत्री के अनुसार, स्वामी लक्ष्मणानंद ने सुविधाओं से भरी जिंदगी को छोड़कर समाज सेवा का रास्ता चुना। उन्होंने कंधमाल के दूर-दराज और घने जंगलों वाले क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के बीच रहकर सेवा कार्य किया।

माझी ने उनके जीवन को त्याग, सेवा और समाज के प्रति समर्पण का उदाहरण बताया।

आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने स्वामी लक्ष्मणानंद के शिक्षा संबंधी कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वामी ने चाकापाडा और जलेस्पटा में आश्रम स्थापित किए।

इन आश्रमों के माध्यम से उन्होंने दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में काम किया। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से लड़कियों के लिए शुरू किए गए गुरुकुल का उल्लेख किया।

इस गुरुकुल के माध्यम से आदिवासी लड़कियों को संस्कृत की शिक्षा और संस्कार प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य लड़कियों को शिक्षा के साथ आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना था।

शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर

स्वामी लक्ष्मणानंद द्वारा आदिवासी लड़कियों के लिए गुरुकुल की स्थापना को मुख्यमंत्री ने उनके दूरदर्शी कार्यों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाने का प्रयास उनके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

संस्कृत शिक्षा के साथ संस्कार और आत्मनिर्भरता पर जोर देकर उन्होंने आदिवासी समुदाय की बेटियों के लिए नए अवसर तैयार करने का प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक बताया और कहा कि उनकी विरासत को संरक्षित करना समाज की जिम्मेदारी है।

जन्म शताब्दी समारोह में जुटे लोग

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी के अवसर पर गुरुजंग में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उनके जीवन, आध्यात्मिक योगदान और सामाजिक सेवा के कार्यों को याद किया गया।

मुख्यमंत्री की ओर से गांव को हेरिटेज विलेज और पंचायत को मॉडल पंचायत बनाने की घोषणा को कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण माना गया।

विकास और विरासत का होगा संगम

गुरुजंग को हेरिटेज विलेज के रूप में विकसित करने की योजना से गांव के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। वहीं मॉडल पंचायत के रूप में विकास किए जाने से स्थानीय बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य सामने आया है।

सरकार की दोनों घोषणाओं को एक साथ देखें तो इसका उद्देश्य गांव की विरासत को संरक्षित करने के साथ आधुनिक विकास को आगे बढ़ाना है। इससे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ गुरुजंग की पहचान व्यापक स्तर पर स्थापित होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की घोषणा के बाद गुरुजंग गांव के विकास को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्मभूमि को हेरिटेज विलेज और गुरुजंग पंचायत को मॉडल पंचायत के रूप में विकसित करने की योजना से विरासत संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्वामी लक्ष्मणानंद के त्याग, आदिवासी सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

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