ACF मौत मामला: पूर्व DFO संग्राम बेहरा का सरेंडर

Update: 2026-07-27 10:09 GMT

परलाखेमुंडी: हाई-प्रोफाइल असिस्टेंट कंज़र्वेटर ऑफ़ फ़ॉरेस्ट (ACF) सौम्य रंजन महापात्रा की मौत के मामले में आरोपी गजपति के पूर्व डिविज़नल फ़ॉरेस्ट ऑफ़िसर (DFO) संग्राम बेहरा ने सोमवार को परलाखेमुंडी स्थित सब-डिविज़नल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (SDJM) कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया। बेहरा ने अपने वकील के माध्यम से अदालत में आत्मसमर्पण किया। इस मामले में उनकी भूमिका को लेकर जांच एजेंसियों की नजर लंबे समय से उन पर बनी हुई थी।

सरेंडर से पहले ओडिशा हाई कोर्ट ने संग्राम बेहरा को निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया था। अदालत से मिली इस राहत के बाद उन्होंने तय समय सीमा के भीतर SDJM कोर्ट में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की। उनके सरेंडर के बाद अब अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी।

सौम्य रंजन महापात्रा की मौत का मामला पिछले कुछ समय से राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। ACF के रूप में कार्यरत सौम्य रंजन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद कई सवाल उठे थे। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कई लोगों से पूछताछ की गई। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर संग्राम बेहरा का नाम आरोपी के रूप में सामने आया।

पूर्व DFO संग्राम बेहरा गजपति जिले में वन विभाग के महत्वपूर्ण पद पर तैनात रह चुके हैं। सरकारी सेवा में उच्च पद पर रहने के कारण इस मामले में उनकी भूमिका को लेकर विशेष ध्यान दिया गया। जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, बयानों और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की।

सोमवार को अदालत में सरेंडर करने के बाद अब जांच प्रक्रिया में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत यह तय करेगी कि आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा या जांच के लिए अन्य कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मामले से जुड़े सभी पक्षों की नजर अब कोर्ट की अगली सुनवाई पर है।

इस मामले में मृतक ACF सौम्य रंजन महापात्रा के परिवार और समर्थकों ने शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच की मांग की थी। घटना के बाद विभागीय स्तर पर भी कई सवाल उठे थे। लोगों की मांग थी कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

जांच एजेंसियों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। सरकारी विभागों में कार्यस्थल के माहौल, अधिकारियों के बीच संबंध और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में आए हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी आरोपी का अदालत में सरेंडर करना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके बाद अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और जांच की स्थिति के आधार पर आगे के आदेश जारी करती है। आरोपी को भी कानून के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट द्वारा सरेंडर के लिए समय दिए जाने के बाद संग्राम बेहरा का अदालत में उपस्थित होना मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब जांच की दिशा और अदालत की आगे की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।

सौम्य रंजन महापात्रा मौत मामले में लोगों की नजर अब न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने और अदालत में आगे की सुनवाई के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।

Tags:    

Similar News