भुवनेश्वर: ओडिशा में लंबे अंतराल के बाद हुए छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों में जीत दर्ज की है। शुक्रवार तक सामने आई जानकारी में एबीवीपी की जीत का आंकड़ा 117 संस्थानों तक बताया गया है। उत्कल विश्वविद्यालय में अध्यक्ष और सचिव पद पर संगठन समर्थित उम्मीदवारों की सफलता प्रमुख रही। हालांकि, विभिन्न चरणों में सामने आए आंकड़े अलग हैं और संगठनवार सभी संस्थानों की अंतिम आधिकारिक सूची उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जीत के कुल आंकड़े को इसी स्थिति के साथ देखा जाना चाहिए। 
प्रमुख परिसरों में मिली सफलता
उत्कल विश्वविद्यालय के परिणामों पर छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की नजर थी। यहां देर रात घोषित नतीजों में एबीवीपी ने अध्यक्ष और सचिव पद जीते। इसके अलावा भुवनेश्वर के बीजेबी ऑटोनॉमस कॉलेज और राजधानी कॉलेज में भी संगठन समर्थित उम्मीदवारों को सफलता मिली। बीजेबी कॉलेज में आर्यन महापात्र और राजधानी कॉलेज में अविनाश पाढ़ी अध्यक्ष चुने गए। इन संस्थानों के नतीजे एबीवीपी के मजबूत प्रदर्शन का हिस्सा रहे। अलग-अलग परिसरों के परिणाम सामने आने के साथ संगठन समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया। 
बीसीजेडी ने भी जीते महत्वपूर्ण पद
चुनाव की तस्वीर केवल एक संगठन की जीत तक सीमित नहीं रही। बीजू छात्र जनता दल ने भी कुछ महत्वपूर्ण संस्थानों में सफलता हासिल की। रमा देवी महिला विश्वविद्यालय में सोनाली बेहरा छात्रसंघ अध्यक्ष चुनी गईं। उन्होंने एबीवीपी समर्थित निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हराया। कटक के रेवेंशॉ विश्वविद्यालय में बीसीजेडी के विश्वजीत साहू ने अध्यक्ष पद जीता। इन परिणामों से स्पष्ट है कि राज्य के कई बड़े परिसरों में दोनों प्रमुख छात्र संगठनों के बीच प्रतिस्पर्धा रही। इसलिए बीसीजेडी को पूरे राज्य में पूरी तरह पराजित बताना उपलब्ध नतीजों की पूरी तस्वीर पेश नहीं करता। 
अंगुल में सभी आठ पदों पर जीत
अंगुल महिला महाविद्यालय में एबीवीपी समर्थित उम्मीदवारों ने छात्रसंघ के सभी आठ पद जीते। आकांक्षा प्रधान अध्यक्ष और प्रीतिस्मिता नायक महासचिव चुनी गईं। संबलपुर के गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय में भी एबीवीपी समर्थित स्वाधीन आचार्य के अध्यक्ष चुने जाने की जानकारी सामने आई। इन परिणामों के बीच कॉलेजों में जीत और किसी विशेष पद पर जीत के आंकड़ों को अलग समझना जरूरी है। किसी संस्थान में अध्यक्ष पद जीतना और वहां के सभी पद जीतना एक जैसी उपलब्धि नहीं है। संगठनवार तुलना के लिए पदवार परिणाम अधिक स्पष्ट आधार देते हैं। 
निर्दलीय उम्मीदवार भी रहे मुकाबले में
निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी कई परिसरों में अपनी जगह बनाई। खल्लिकोट विश्वविद्यालय, शैलाबाला महिला कॉलेज और महर्षि कॉलेज ऑफ नेचुरल लॉ में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी कुछ संस्थानों में महत्वपूर्ण पद जीतने का दावा किया। हालांकि, उसके प्रदर्शन का पूर्ण और एकीकृत आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। इसलिए किसी संगठन की कुल सफलता या विफलता का अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले सभी संस्थानों के नतीजों का मिलान आवश्यक है। 
मतदान के बाद चरणों में आए परिणाम
राज्य में 15 अक्टूबर को छात्रसंघ चुनाव हुए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मतदान सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक चला। इसके बाद मतगणना शुरू हुई और परिणाम क्रमशः घोषित किए गए। शुरुआती चरण में 153 कॉलेजों के 1,398 उम्मीदवार विजयी घोषित होने की जानकारी दी गई थी। इसी दौरान एबीवीपी नेता प्रत्युष रंजन दास ने 112 कॉलेजों में संगठन की जीत का दावा किया था। बाद की जानकारी में 117 संस्थानों का आंकड़ा आया। ये अलग समय पर सामने आए विवरण हैं, जिन्हें अंतिम प्रमाणित राज्यव्यापी परिणाम से अलग रखना चाहिए। 
छात्र राजनीति की वापसी पर राजनीतिक नजर
लगभग आठ साल के अंतराल के बाद हुए इन चुनावों ने राज्य की छात्र राजनीति को फिर सक्रिय किया है। भाजपा, बीजद और कांग्रेस के लिए ये चुनाव युवा मतदाताओं से संवाद और परिसर की समस्याओं को समझने का अवसर भी बने। प्रचार के दौरान विभिन्न दलों के नेताओं ने उम्मीदवारों का समर्थन किया। अब निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने छात्रों की अपेक्षाओं और संस्थानों से जुड़े मुद्दों को उठाने की जिम्मेदारी होगी।
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