भुवनेश्वर। ओडिशा के गंजाम जिले में भीषण भूस्खलन के बाद लापता लोगों की तलाश को बड़ा झटका लगा है। भंजनगर ब्लॉक की बाइबाली पंचायत के गिदिपाबाली गांव में हुए भूस्खलन के बाद चलाए जा रहे खोज एवं बचाव अभियान को खराब मौसम और सुरक्षा संबंधी खतरों के कारण रोक दिया गया है। कई दिनों की कोशिशों के बावजूद मलबे में दबे लोगों का पता नहीं चल सका है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, 11 लोग अब भी लापता हैं, जबकि अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम और पहाड़ी क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा करने के बाद ही बचाव अभियान दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।

गंजाम और कंधमाल जिलों की सीमा के पास स्थित गिदिपाबाली गांव में पिछले सप्ताह भारी बारिश के कारण भीषण भूस्खलन हुआ था। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में चट्टानें, मिट्टी और कीचड़ नीचे आ गए, जिससे गांव के कई मकान मलबे में दब गए। इस प्राकृतिक आपदा ने गांव में भारी तबाही मचाई और अनेक परिवार प्रभावित हुए।

भूस्खलन के बाद प्रशासन ने लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान शुरू किया था। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ), अग्निशमन सेवाओं और अन्य संबंधित एजेंसियों के कर्मियों को अभियान में लगाया गया। बचाव दल ने लगातार कई दिनों तक मलबा हटाने और दबे लोगों का पता लगाने की कोशिश की।

हालांकि, दुर्गम पहाड़ी इलाका और लगातार प्रतिकूल मौसम बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बने रहे। घटनास्थल पर बड़ी-बड़ी चट्टानों और मिट्टी के विशाल ढेरों के कारण भारी मशीनों का इस्तेमाल भी चुनौतीपूर्ण हो गया। बचावकर्मियों को आशंका थी कि मलबा हटाने के दौरान पहाड़ी का अस्थिर हिस्सा दोबारा खिसक सकता है।

मंगलवार को अभियान के चौथे दिन भी लापता लोगों की तलाश जारी रही, लेकिन कोई नया शव बरामद नहीं हो सका। इससे पहले बचाव दल दो शव निकालने में सफल रहा था। लगातार कोशिशों के बावजूद अन्य लापता लोगों का पता नहीं चलने से उनके परिजनों की चिंता बढ़ती गई।

गंजाम के कलेक्टर वी. कीर्ति वासन ने खराब मौसम और दोबारा भूस्खलन की आशंका को देखते हुए बचाव अभियान रोकने की जानकारी दी। प्रशासन का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में अभियान जारी रखने से बचाव दल के सदस्यों और अधिकारियों की जान खतरे में पड़ सकती है। इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थिति की समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है।

कंधमाल जिला प्रशासन की ओर से भी बताया गया कि बचाव कार्य पर रोक सुरक्षा कारणों से लगाई गई है। कंधमाल के कलेक्टर वेदभूषण के अनुसार, यह अंतिम निर्णय नहीं है और मौसम अनुकूल होने पर लापता लोगों की तलाश दोबारा शुरू करने की संभावना बनी हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्र में एक ही रात के दौरान कई बार भूस्खलन हुआ था। इससे मलबे की परतें लगातार बढ़ती गईं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि लापता लोग मलबे के काफी नीचे दबे हो सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि मलबे की गहराई 30 फीट से अधिक हो सकती है।

इतनी अधिक गहराई तक खोज करना बचाव दल के लिए बेहद कठिन हो गया है। भारी पत्थरों को हटाने के लिए विस्फोटक तकनीक का इस्तेमाल भी जोखिमपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे आसपास की अस्थिर चट्टानें दोबारा खिसक सकती हैं। इस स्थिति में बचावकर्मियों की सुरक्षा के साथ पूरे पहाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर ध्यान देना आवश्यक है।

प्रभावित गांव तक पहुंचने में भी शुरुआत से मुश्किलें सामने आई थीं। भारी बारिश के कारण आसपास के रास्ते प्रभावित हुए और दुर्गम इलाके में राहत सामग्री तथा मशीनें पहुंचाना चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद प्रशासन ने विभिन्न एजेंसियों की मदद से बचाव अभियान आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

इस प्राकृतिक आपदा ने गिदिपाबाली गांव के कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। मकानों के मलबे में दब जाने के कारण प्रभावित लोगों के सामने आवास और आजीविका की समस्याएं भी खड़ी हो गई हैं। गांव के जो लोग सुरक्षित निकलने में सफल रहे, उन्हें अपने परिजनों के बारे में जानकारी मिलने का इंतजार है।

बुधवार को गंजाम और कंधमाल जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने लापता लोगों के परिवारों से बातचीत की। इस दौरान परिजनों की चिंताओं को सुना गया और आगे की व्यवस्था पर चर्चा की गई। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।

स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और रहने की व्यवस्था से जुड़े विकल्पों पर भी चर्चा की है। जिन परिवारों के सदस्य इस आपदा में मारे गए हैं, उनके अंतिम संस्कार और धार्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर भी परिजनों की राय ली जा रही है।

इस बीच लापता लोगों की तलाश बंद होने से परिजनों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, प्रशासन ने यह नहीं कहा है कि भविष्य में कोई प्रयास नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने मौसम में सुधार होने और परिस्थितियां सुरक्षित होने पर नए सिरे से कार्रवाई की संभावना जताई है।

भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में लगातार बारिश की आशंका अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। पहाड़ी की मिट्टी कमजोर होने के कारण दोबारा भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है। ऐसे में राहत और बचाव कार्य को आगे बढ़ाने से पहले भूगर्भीय तथा सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों का आकलन आवश्यक होगा।

गिदिपाबाली गांव की यह त्रासदी पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश से उत्पन्न होने वाले खतरों को उजागर करती है। दूरदराज के गांवों तक समय पर पहुंच, सुरक्षित निकासी और आपदा के बाद मलबा हटाने जैसी चुनौतियां राहत अभियान को और कठिन बना देती हैं।

फिलहाल प्रशासन का ध्यान प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने और घटनास्थल की सुरक्षा पर है। लापता लोगों की तलाश दोबारा शुरू होगी या नहीं, इसका निर्णय मौसम और तकनीकी समीक्षा के बाद लिया जाएगा। इस त्रासदी में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के लिए आने वाले दिन बेहद कठिन रहने वाले हैं।

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