भुवनेश्वर : उड़ीसा उच्च न्यायालय द्वारा ओडिशा खनन निगम (ओएमसी) के साथ 2004 के बॉक्साइट मूल्य निर्धारण और आपूर्ति व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की वेदांता की याचिका को खारिज करने के साथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री और संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को विपक्ष के नेता और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक पर हमला करने के लिए फैसले का इस्तेमाल किया। उन्होंने नवीन पर एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 पर ओडिशा के लोगों को बार-बार गुमराह करने का आरोप लगाया।

एक्स पर एक पोस्ट में प्रधान ने कहा कि ओडिशा के लोग इतने भोले नहीं हैं कि बार-बार दोहराए गए झूठ को सच मान लें। उन्होंने कहा, "उड़ीसा उच्च न्यायालय के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पिछली बीजद सरकार ने नियमों में बदलाव करके निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया था।"

प्रधान ने कहा कि उच्च न्यायालय ने एक विशिष्ट निजी औद्योगिक घराने द्वारा किए गए 150 मिलियन टन बॉक्साइट आपूर्ति के दावे को खारिज कर दिया था, जिसका वादा 2004 में बीजद सरकार ने किया था। उन्होंने कहा, अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक संसाधनों के संबंध में पुराने वादे कानून से आगे नहीं बढ़ सकते।

प्रधान ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के एमएमडीआर अधिनियम और खनिज (परमाणु और हाइड्रो कार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत नियम, 2016 (एमसीआर, 2016) के नियम 45 में संशोधन के बाद, बॉक्साइट की औसत बिक्री मूल्य पर एक रूपांतरण कारक लागू किया गया था।

नतीजा यह हुआ कि बॉक्साइट की कीमत 750 रुपये प्रति टन से बढ़कर 1,707 रुपये प्रति टन हो गयी. उन्होंने कहा, इससे ओएमसी को फायदा होगा और रॉयल्टी, डीएमएफ और एनएमईटी के माध्यम से राज्य के लिए हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न होगा।

प्रधान ने आरोप लगाया कि नवीन, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री थे, ने 1 फरवरी और 7 अक्टूबर, 2020 को केंद्र को अलग-अलग पत्र लिखकर रूपांतरण कारक को कम करने और निजी कंपनी द्वारा मांगी गई न्यूनतम कीमत लागू करने का अनुरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया, ''यह स्पष्ट रूप से साबित करता है कि पत्र राज्य के हितों का त्याग करके एक विशिष्ट निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए लिखे गए थे, जिसे केंद्र ने खारिज कर दिया।''


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