नागालैंड: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ अपनी तीन मांगों पर सहमति बनने के बाद, 'सेंट्रल चखेसांग यूथ ऑर्गनाइजेशन' (CCYO) ने 15 अक्टूबर को अपना असहयोग आंदोलन और नागालैंड के फेक जिले में तीन वन कार्यालयों के सामने चल रहा अनिश्चितकालीन धरना वापस ले लिया।
इस आंदोलन का दूसरा चरण 12 अक्टूबर को शुरू हुआ था, जब संगठन ने पारंपरिक तरीके से फेक में डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) के कार्यालय, और फेक तथा फुत्सेरो में वन रेंज कार्यालयों पर ताले लगा दिए थे।
आंदोलन वापस लेने का फैसला बुधवार को कोहिमा में CCYO और विभाग के बीच हुई एक बैठक के बाद लिया गया, जिसमें दोनों पक्ष संगठन द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुलझाने के कदमों पर सहमत हुए।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख वेदपाल सिंह तथा CCYO अध्यक्ष डोडे नाक्रो द्वारा हस्ताक्षरित एक संयुक्त घोषणापत्र के अनुसार, दोनों पक्ष वेझोटो हेसुह से जुड़े मामले को अदालत के बाहर आपसी सहमति से सुलझाने पर सहमत हुए हैं।
घोषणापत्र में बताया गया है कि विभाग ने 1 अक्टूबर को भी संगठन के साथ बैठक की थी, जिसमें हेसुह के खिलाफ मामला वापस लेने और उचित सुधारात्मक कार्रवाई पर चर्चा हुई थी। हालांकि, मामला तब नहीं सुलझ सका क्योंकि हेसुह के सहयोग और अदालत की भागीदारी के बिना विभाग इसे हल नहीं कर सकता था।
बताया गया है कि हेसुह ने कहा कि उन्हें संबंधित कानूनों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी नहीं थी, और उन्होंने जो कुछ भी किया, वह एक बचाव अभियान (रेस्क्यू मिशन) के तहत किया था। उन्होंने भी इस मामले को अदालत के बाहर सुलझाने की इच्छा जताई है।
CCYO की दूसरी मांग पोरबा गांव से जब्त किए गए 'ग्रेट बारबेट' (एक पक्षी) को वापस करने के बारे में थी। घोषणापत्र के अनुसार, यह मुद्दा 30 सितंबर को ही सुलझा लिया गया था, जब उस पक्षी को गांव के सामुदायिक वन में छोड़ दिया गया था।
संगठन की तीसरी मांग 1 लाख रुपये की कथित मांग के मामले में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की थी, जिसमें इसमें शामिल अधिकारियों की पहचान करना भी शामिल है। घोषणापत्र में कहा गया है कि पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और अब इसके नतीजों का इंतजार है।
संयुक्त घोषणापत्र में इस समझौते तक पहुंचने में मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के हस्तक्षेप को अहम बताया गया है। इसमें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी सलाहकार कुझोलुज़ो निएनु, विलेज गार्ड्स के प्रतिनिधि सी.एल. जॉन, और प्रधान सचिव तथा विकास आयुक्त वाई. किखेतो सेमा के प्रयासों को भी सराहा गया।
CCYO का कहना है कि अनुच्छेद 371A को लेकर उनका व्यापक अभियान जारी रहेगा।
आंदोलन वापस लेने की घोषणा करते हुए, CCYO ने उन जनजातीय निकायों, नागरिक समाज समूहों, युवा संगठनों और व्यक्तियों को धन्यवाद दिया जिन्होंने उनके आंदोलन का समर्थन किया था। साथ ही, उन्होंने एकजुटता दिखाने के लिए नागा लोगों का भी आभार जताया।
हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया कि आंदोलन खत्म करने का मतलब यह नहीं है कि अनुच्छेद 371A के संदर्भ में नागालैंड में 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' को लागू करने से जुड़ा उनका व्यापक अभियान भी समाप्त हो गया है।
CCYO ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह वन्यजीव कानूनों और अन्य ऐसे कानूनों की फिर से समीक्षा करे, जो नागाओं की पारंपरिक प्रथाओं, सामाजिक परंपराओं, और भूमि तथा उसके संसाधनों के स्वामित्व और हस्तांतरण से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा उपायों को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने जनता, जनजातीय संगठनों, पारंपरिक संस्थाओं और अन्य हितधारकों के साथ सार्थक बातचीत करने की मांग की। उनका तर्क है कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों को इस तरह लागू किया जाना चाहिए जिससे नागा लोगों को मिले संवैधानिक संरक्षण और उनके पारंपरिक अधिकारों का सम्मान हो।
संगठन ने जोर देकर कहा कि उनके अभियान का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण या पर्यावरण सुरक्षा को कमजोर करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि संरक्षण के उपाय नागा लोगों की विशिष्ट पहचान और उनके संवैधानिक सुरक्षा उपायों का सम्मान करें।
उन्होंने कहा कि वे अनुच्छेद 371A से जुड़े व्यापक मुद्दों को शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से उठाना जारी रखेंगे।
संगठन ने कहा, "आंदोलन भले ही वापस ले लिया गया हो, लेकिन न्याय, संवैधानिक अधिकारों और हमारी पारंपरिक संस्थाओं की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अडिग है।"