मिजोरम: मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने 15 अक्टूबर को चार डिजिटल वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों की शुरुआत की। इनका उद्देश्य राज्य के सार्वजनिक वित्त प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता को बेहतर बनाना है।
इन पहलों — मिजोरम इंटीग्रेटेड वर्क्स अकाउंट्स सिस्टम (MIWAS), ई-सेंक्शन, ई-बजट और 100 प्रतिशत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) — को मुख्यमंत्री कार्यालय में लॉन्च किया गया।
MIWAS छह विभागों में कार्यों के हिसाब-किताब (वर्क्स अकाउंट्स) को सुव्यवस्थित करेगा। ये विभाग हैं: लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग, बिजली और विद्युत, सिंचाई और जल संसाधन, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन, तथा भूमि संसाधन, मृदा और जल संरक्षण। इस प्रणाली से अकाउंटेंट जनरल के साथ खर्च के रिकॉर्ड का मिलान बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही, यह सुनिश्चित होगा कि ट्रेजरी के माध्यम से खर्च के वाउचर सही तरीके से जमा किए जाएं।
ई-बजट मॉड्यूल विभागों को 'इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम' (IFMIS) के जरिए ऑनलाइन बजट प्रस्ताव तैयार करने और जमा करने की सुविधा देगा। इससे कागजी काम कम होने, गणना में होने वाली गलतियां घटने और बजट तैयार करने की प्रक्रिया में देरी न होने की उम्मीद है।
ई-सेंक्शन मॉड्यूल खर्च की मंजूरियों की इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसिंग को संभव बनाएगा। इससे प्रस्ताव 'ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर्स' (DDO) और विभागाध्यक्षों से संबंधित प्रशासनिक विभागों और वित्त विभाग तक आसानी से पहुंच सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि उपलब्ध बजट से अधिक खर्च न हो सके।
100 प्रतिशत DBT प्रणाली के तहत, राज्य सरकार की योजनाओं — जैसे फसल खरीद पहल 'थलाई थार लीना', प्रमुख योजना 'बाना काइह' और बिजली सब्सिडी — के भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जाएंगे। ट्रेजरी द्वारा बिल पास किए जाने के बाद यह राशि ट्रांसफर होगी। लाभार्थी और अधिकारी IFMIS के जरिए भुगतान की स्थिति (पेमेंट स्टेटस) को ट्रैक भी कर सकेंगे।
लॉन्च के अवसर पर बोलते हुए, लालदुहोमा ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सार्वजनिक धन के कुशल उपयोग में डिजिटल वित्तीय प्रबंधन की भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि पिछले साल मिजोरम को 'स्पेशल असिस्टेंस फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट' (SASCI) योजना के भाग IX के तहत 350 करोड़ रुपये मिले थे, और अब राज्य 2026-27 के लिए लगभग 650 करोड़ रुपये प्राप्त करने की तैयारी कर रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य के डिजिटल वित्तीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में वित्त विभाग, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) विभाग, इंटरलेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) के योगदान को भी सराहा।
ये चार पहलें राज्य सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य वित्तीय प्रशासन को आधुनिक बनाना, सार्वजनिक व्यय की निगरानी में सुधार करना और सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को सुव्यवस्थित करना है।