आइजोल: मिजोरम भविष्य में टूरिज्म को मैनेज करने के लिए भूटान को एक संभावित मॉडल के तौर पर देख रहा है। राज्य के टूरिज्म मिनिस्टर लालघिंगलोवा हमार ने मंगलवार को कहा कि जब यह सेक्टर पूरी तरह विकसित हो जाएगा, तो राज्य ज़्यादा पाबंदियां लगाने और ज़्यादा खर्च करने वाले (हाई-वैल्यू, हाई-एंड) टूरिस्ट्स पर ध्यान देने पर विचार करेगा।
हालांकि, हमार ने कहा कि मिजोरम अभी टूरिज्म डेवलपमेंट के "शुरुआती दौर" में है और तुरंत ऐसी पाबंदियां नहीं अपना सकता, क्योंकि उसे पहले ज़्यादा टूरिस्ट्स को आकर्षित करने और खुद को एक टूरिज्म डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित करने की ज़रूरत है।
यहां एक ट्रैवल फेस्टिवल के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में हमार ने कहा, "हम भूटान जैसा बनना चाहेंगे, जहां बहुत सारी पाबंदियां हैं। यह हाई-वैल्यू, सिर्फ़ हाई-एंड टूरिस्ट वाला मॉडल है, लेकिन अभी हम इस बारे में बात करने की स्थिति में नहीं हैं।"
उन्होंने कहा कि टूरिस्ट्स की बढ़ती संख्या के असर का आकलन करने के बाद मिजोरम धीरे-धीरे ऐसे मॉडल की ओर बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि लोग मिजोरम आएं। फिर हम एक सही टाइमलाइन के साथ और पाबंदियां लगाएंगे। हो सकता है कि पांच या दस साल में हम उस दिशा में काम करें।"
हमार ने कहा कि सरकार इस बात से वाकिफ है कि टूरिज्म में तेज़ी से बढ़ोतरी के सामाजिक और सांस्कृतिक नतीजे हो सकते हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और स्थानीय परंपराओं व रीति-रिवाजों के संरक्षण से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा, "हम इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि भविष्य में टूरिज्म क्या ला सकता है। हमें इसकी जानकारी है, हम तैयार हैं, लेकिन हम यह नहीं कह सकते कि हम पूरी तरह तैयार हैं।" उन्होंने टूरिस्ट्स की संख्या बढ़ने के साथ शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
हमार ने माना कि पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की तुलना में मिजोरम ने अपनी टूरिज्म क्षमता का इस्तेमाल करने में "देर से शुरुआत" की है, लेकिन उन्होंने कहा कि राज्य अपनी संस्कृति, एडवेंचर और प्रकृति के ज़रिए खुद को अलग पहचान दिलाने की कोशिश करेगा।
उन्होंने कहा, "हम मिजोरम की हरियाली को प्रमोट करना चाहते हैं," और साथ ही कहा कि कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि सैरांग तक रेलवे लिंक पूरा होने के बाद बेहतर कनेक्टिविटी से मिजोरम की टूरिज्म संभावनाओं में काफी बदलाव आएगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार राज्य को प्रमोट करने के लिए महंगे सेलिब्रिटी एंबेसडर पर ज़्यादा निर्भर रहने के बजाय सोशल मीडिया का इस्तेमाल करेगी।
उन्होंने कहा कि मिज़ोरम अपनी "असली" पहचान को प्रमोट करेगा, जिसमें हॉर्न न बजाने का कल्चर, ट्रैफ़िक नियमों का पालन और पारंपरिक रीति-रिवाज़ शामिल हैं।
हमार ने यह भी कहा कि मिज़ोरम टूरिज़्म डेवलपमेंट अथॉरिटी ने टूरिज़्म के असर का पूरा आकलन करने के लिए मिज़ोरम यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर काम करने का फ़ैसला किया है।
इस प्रस्तावित स्टडी में राज्य पर टूरिज़्म के आर्थिक, सामाजिक और दूसरे असर की जांच की जाएगी और इससे सरकार को भविष्य में टूरिज़्म के विकास के लिए सही रास्ता तय करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, "हम अभी शुरुआती दौर में हैं। इसलिए, हम धीरे-धीरे उस दिशा में आगे बढ़ेंगे।"