पुरानी बुनाई परंपरा को बचाने के लिए आगे आया मिजोरम
‘लाई’ वस्त्र परंपरा के संरक्षण में जुटा मिजोरम
आइजोल: मिजोरम में लाई समुदाय की पारंपरिक टेक्सटाइल विरासत को संरक्षित करने के लिए नई पहल शुरू की गई है। गवर्नमेंट आइजोल वेस्ट कॉलेज में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में लाई वस्त्रों के इतिहास, पारंपरिक बुनाई तकनीक, डिजाइन और सांस्कृतिक पहचान को व्यवस्थित तरीके से दस्तावेजित करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में Lai Autonomous District Council (LADC) के चीफ एग्जीक्यूटिव मेंबर C. Lalsawmzuala ने कहा कि लाई टेक्सटाइल केवल कपड़ा नहीं, बल्कि समुदाय की जीवनशैली, कौशल और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि 1855 का एक लाई वस्त्र लंदन के Victoria and Albert Museum में संरक्षित है, जिससे इस परंपरा की ऐतिहासिक गहराई का पता चलता है।
उन्होंने Hnika, Khuptangtial, Nawnthum Hni, Chawngnak, Canlo और Biarpi जैसे पारंपरिक लाई टेक्सटाइल डिजाइनों का भी जिक्र किया। इन डिजाइनों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए उनके मूल, बुनाई तकनीक, रंग और डिजाइन का विस्तृत अध्ययन करने की जरूरत बताई गई।
आधुनिक मशीनों और नई बुनाई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच पारंपरिक तरीकों की मौलिकता को बनाए रखना भी बड़ी चुनौती माना गया। इसी कारण पुराने बुनकरों के अनुभव और तकनीकों को वीडियो इंटरव्यू के जरिए रिकॉर्ड करने की योजना पर भी जोर दिया गया है।
LADC की योजना आगे और अधिक हैंडलूम फेयर और प्रदर्शनियां आयोजित करने की है। इसके साथ डिजाइनरों के साथ मिलकर टेक्सटाइल की गुणवत्ता और डिजाइन को बेहतर बनाने तथा बाजार तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में Lai Textile Heritage Village स्थापित करने की संभावना भी शामिल है। इसके लिए केंद्र सरकार से सहयोग लेने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य पारंपरिक बुनाई, डिजाइन और लाई समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को एक ही स्थान पर संरक्षित और प्रदर्शित करना होगा।
मिजोरम में पहले से ही हैंडलूम, सिल्क और टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। केंद्र और राज्य स्तर पर भी सिल्क, सेरिकल्चर और ग्रामीण बुनकरों को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं और सहयोग पर काम जारी है।