इंफाल: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत में मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में कैंसर के मामले सबसे अधिक हैं।
वहीं, मणिपुर में कैंसर के मामले क्षेत्रीय और राष्ट्रीय औसत, दोनों से कम हैं।
शुक्रवार को मणिपुर प्रेस क्लब में आयोजित ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता और स्क्रीनिंग कार्यक्रम के दौरान, 'बेबीना ग्रुप ऑफ कंपनीज' के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर धाबली थांगजाम ने ये आंकड़े साझा किए।
इस कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टीट्यूट, बेबीना स्पेशलिटी हॉस्पिटल और ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन ने मिलकर किया था।
आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में पुरुषों में कैंसर के मामले मिजोरम में सबसे अधिक हैं, जहां प्रति 1,00,000 पुरुषों पर 269 मामले सामने आए हैं। महिलाओं में कैंसर के मामले अरुणाचल प्रदेश में सबसे अधिक हैं, जहां प्रति 1,00,000 महिलाओं पर 219 मामले दर्ज किए गए हैं।
मणिपुर के आंकड़े राष्ट्रीय औसत (प्रति 1,00,000 महिलाओं पर 105 मामले और प्रति 1,00,000 पुरुषों पर 95 मामले) से कम हैं। राज्य में प्रति 1,00,000 महिलाओं पर 71.1 मामले और प्रति 1,00,000 पुरुषों पर 62.8 मामले दर्ज किए गए हैं।
थांगजाम ने कहा कि भले ही मणिपुर में कैंसर के मामले तुलनात्मक रूप से कम हैं, फिर भी बीमारी का जल्दी पता लगाने और समय पर इलाज के लिए लोगों में जागरूकता होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कैंसर का पता चलने को 'मौत की सजा' न समझें। उन्होंने कहा कि अगर बीमारी का जल्दी पता चल जाए, तो इसका बेहतर इलाज संभव है और मरीज पूरी तरह ठीक भी हो सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत में हर नौ में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर होने का खतरा रहता है। भारतीय पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर (लंग कैंसर) सबसे आम है, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।
थांगजाम ने इस क्षेत्र में सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर) के मामलों में कमी का कारण बेहतर साफ-सफाई और जीवनशैली में आए बदलावों को बताया। उन्होंने कहा कि कैंसर के खतरे को कम करने के लिए तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहना बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने मरीजों के सामने पहले आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले कई लोगों को इलाज के लिए गुवाहाटी या देश के अन्य हिस्सों में जाना पड़ता था, क्योंकि स्थानीय स्तर पर विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने कहा कि बबीना स्पेशलिटी हॉस्पिटल में अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टीट्यूट की स्थापना से स्थानीय स्तर पर कैंसर की जांच और इलाज में मौजूद कमियां दूर हुई हैं।
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