शिलांग: मेघालय में लंबे समय से प्रतिबंधित छोटे पैमाने के कोयला खनन को फिर से शुरू करने की संभावनाओं पर केंद्र और राज्य सरकार विचार कर रही हैं। केंद्रीय कोयला मंत्रालय की एक तकनीकी टीम ने राज्य के कोयला उत्पादक क्षेत्रों का दौरा कर खनन गतिविधियों को दोबारा शुरू करने की व्यवहार्यता का आकलन किया है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय लोगों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित, वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल खनन की संभावनाएं तलाशना है।
केंद्रीय टीम ने ईस्ट जयंतिया हिल्स और खासी हिल्स के कोयला क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान खनन की मौजूदा स्थिति, सुरक्षा मानकों, पर्यावरणीय चुनौतियों और कानूनी आवश्यकताओं की समीक्षा की गई। हालांकि, सरकार ने अभी खनन दोबारा शुरू करने की अंतिम मंजूरी नहीं दी है।
केंद्रीय टीम ने किया खनन क्षेत्रों का निरीक्षण
केंद्रीय कोयला मंत्रालय की तकनीकी टीम में सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) और खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के अधिकारी शामिल थे। टीम के साथ मेघालय के खनिज संसाधन निदेशालय के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने पिछले सप्ताह ईस्ट जयंतिया हिल्स और खासी हिल्स के विभिन्न कोयला उत्पादक क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान यह जानने का प्रयास किया गया कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और भूमि स्वामित्व की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए छोटे पैमाने पर कोयला खनन किस तरह सुरक्षित रूप से शुरू किया जा सकता है।
2014 से प्रतिबंधित है रैट-होल खनन
मेघालय में अप्रैल 2014 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने रैट-होल कोयला खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह फैसला पर्यावरण को नुकसान, जल प्रदूषण और खदानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण लिया गया था।
रैट-होल खनन में कोयला निकालने के लिए संकरी और गहरी सुरंगें बनाई जाती हैं। इन सुरंगों में काम करना जोखिम भरा होता है। सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। प्रतिबंध के बाद राज्य में छोटे स्तर पर कोयला खनन से जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित हुई। इसी कारण सरकार अब ऐसे विकल्प तलाश रही है, जिनमें खनन गतिविधियां कानूनी नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित की जा सकें।
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने उठाया था मुद्दा
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात की थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के कोयला खनन पर निर्भर परिवारों की समस्याओं को उठाया था। उन्होंने छोटे पैमाने पर खनन गतिविधियों को दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर विचार करने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया था कि खनन गतिविधियों की अनुमति देते समय पर्यावरण संरक्षण और मजदूरों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। केंद्रीय तकनीकी टीम का हालिया निरीक्षण इसी बातचीत के बाद उठाया गया कदम है।
स्थानीय खनिकों की समस्याओं पर हुई चर्चा
निरीक्षण के दौरान केंद्रीय अधिकारियों ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से भी बातचीत की। बैठक में स्थानीय खनिकों की चिंताओं, खनन की तकनीकी जरूरतों और कानूनी प्रावधानों पर विचार किया गया। मेघालय की पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियां और भूमि स्वामित्व की स्थानीय व्यवस्था खनन गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण पहलू हैं। अधिकारियों ने इस बात का आकलन किया कि इन परिस्थितियों में कौन-सी खनन पद्धति सुरक्षित और व्यवहारिक हो सकती है।
पर्यावरण और सुरक्षा नियमों पर विशेष जोर
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। कोयला खनन शुरू करने से पहले खदानों की सुरक्षा, मजदूरों के लिए आवश्यक सुविधाओं, जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण संबंधी मंजूरियों पर विचार करना होगा। केंद्रीय टीम की जांच का उद्देश्य इन्हीं आवश्यकताओं का आकलन करना है। अधिकारियों ने मौजूदा खनन पद्धतियों की समीक्षा के साथ यह भी देखा कि गतिविधियों को लागू कानूनी और नियामकीय ढांचे के भीतर कैसे संचालित किया जा सकता है।
खनन दोबारा शुरू करने पर अभी अंतिम फैसला नहीं
फिलहाल केंद्र और मेघालय सरकार छोटे पैमाने पर कोयला खनन फिर शुरू करने की व्यवहार्यता का अध्ययन कर रही हैं। तकनीकी निरीक्षण का अर्थ यह नहीं है कि प्रतिबंधित रैट-होल खनन को अनुमति मिल गई है। खनन की किसी भी प्रस्तावित व्यवस्था को संबंधित कानूनों, पर्यावरणीय शर्तों और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
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