Meghalaya मेघालय: भारत के चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि लीगल एड सर्विस और वेलफेयर प्रोग्राम को मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना देरी के जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दूरदराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोगों तक न्याय और सरकारी सहायता पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

वे मेघालय के री भोई जिले में आयोजित एक अवेयरनेस कैंप के उद्घाटन के बाद संबोधित कर रहे थे। जस्टिस सूर्यकांत नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) के पैट्रन-इन-चीफ भी हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना था।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा सहायता, आय सृजन योजनाएं और पुनर्वास से जुड़ी सुविधाओं को एकीकृत आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इन सेवाओं का लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो अब तक इनसे वंचित रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के संयुक्त प्रयासों से सरकारी योजनाओं और कानूनी सहायता के बीच की दूरी को कम किया जा सकता है। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह पहल बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

यह कार्यक्रम “ब्रिजिंग द गैप” थीम के तहत आयोजित किया गया था, जिसमें NALSA और विभिन्न सरकारी वेलफेयर स्कीम्स को एक साथ जोड़कर एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस पहल को मेघालय हाई कोर्ट और मेघालय स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (MSLSA) ने राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित किया।

कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि कानूनी सहायता सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक कल्याण योजनाओं को भी प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है, ताकि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंच सके।

अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के कैंप लोगों को न केवल उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हैं, बल्कि उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने में भी मदद करते हैं।

जस्टिस सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि इस तरह के संयुक्त प्रयास भविष्य में देशभर में कानूनी सहायता और सामाजिक कल्याण व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएंगे, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को सीधा लाभ मिलेगा।

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