शिलॉन्ग : मेघालय सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की शुरुआती शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल लर्निंग प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल संसाधन, प्रशिक्षण और स्थानीय भाषा में सीखने की सामग्री उपलब्ध कराना है, ताकि छोटे बच्चों के लिए खेल आधारित और प्रभावी शिक्षा का माहौल तैयार किया जा सके।
मेघालय अर्ली चाइल्डहुड डेवलपमेंट मिशन (MECDM) और रॉकेट लर्निंग के सहयोग से शुरू किए गए इस अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ECCE) कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल सामग्री और प्रशिक्षण सहायता दी जाएगी। यह सामग्री व्हाट्सऐप के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों में काम करने वाले कार्यकर्ता भी आसानी से इसका उपयोग कर सकेंगे।
इस कार्यक्रम में पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार सामग्री, बच्चों की उम्र के अनुसार गतिविधियां और स्थानीय संस्कृति व भाषाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए शिक्षण संसाधन शामिल होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल पोषण और देखभाल के केंद्र न रहकर बच्चों के शुरुआती विकास और सीखने के मजबूत केंद्र बनें।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर एक ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) से जुड़े जिला कार्यक्रम अधिकारियों, बाल विकास परियोजना अधिकारियों, महिला पर्यवेक्षकों और सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका और बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा पद्धति पर चर्चा की गई।
मेघालय सामाजिक कल्याण विभाग की निदेशक सलोनी वर्मा ने कहा कि इस पहल की सफलता के लिए जिला और परियोजना स्तर पर मजबूत सहयोग जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को लगातार समर्थन और प्रोत्साहन देने में अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की अहम भूमिका होगी।
MECDM के मुख्य परिचालन अधिकारी रोनाल्ड क्यंता ने बताया कि शुरुआती बचपन का विकास राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है। डिजिटल माध्यमों से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रशिक्षण और व्यावहारिक उपकरण उपलब्ध कराकर बच्चों की शिक्षा की नींव को मजबूत किया जाएगा।
रॉकेट लर्निंग के अनुसार, तकनीक आधारित यह पहल स्थानीय भाषा, संस्कृति और बच्चों की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के साथ अधिक प्रभावी और रचनात्मक गतिविधियां कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक का उपयोग ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शुरुआती शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मेघालय की यह पहल बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ आंगनवाड़ी प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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