इंफाल: मणिपुर के जातीय संघर्ष और उग्रवाद से जुड़ी खबरों में अक्सर SoO शब्द सुनने को मिलता है। SoO का पूरा नाम Suspension of Operations यानी अभियान का निलंबन है। आसान भाषा में इसका अर्थ ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें समझौते में शामिल सरकारें और सशस्त्र समूह तय शर्तों के तहत एक-दूसरे के खिलाफ हिंसक या सशस्त्र अभियान रोकते हैं और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं।
मणिपुर में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और कुकी संगठनों के दो प्रमुख समूहों—Kuki National Organisation (KNO) और United People’s Front (UPF)—के बीच औपचारिक त्रिपक्षीय SoO व्यवस्था 22 अगस्त 2008 से चली आ रही है। गृह मंत्रालय के पुराने संसदीय रिकॉर्ड के मुताबिक उस समय KNO और UPF के तहत 25 भूमिगत समूह इस व्यवस्था में शामिल थे।
SoO का मतलब आत्मसमर्पण नहीं
SoO को पूर्ण शांति समझौता या सशस्त्र समूहों का आत्मसमर्पण समझना सही नहीं होगा। इसका मुख्य उद्देश्य हिंसक गतिविधियों को रोककर राजनीतिक बातचीत के लिए जगह बनाना है। इसके तहत समूहों के कैडरों, हथियारों और निर्धारित कैंपों को लेकर नियम बनाए जाते हैं। समझौते की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी के लिए व्यवस्था भी होती है। यानी SoO एक नियंत्रित संघर्ष-विराम जैसी प्रक्रिया है, जिसका लक्ष्य अंततः बातचीत के जरिए स्थायी समाधान तक पहुंचना है।
सितंबर 2025 में बदलीं शर्तें
4 सितंबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय, मणिपुर सरकार, KNO और UPF के प्रतिनिधियों ने नई दिल्ली में फिर से बातचीत के बाद संशोधित शर्तों के साथ त्रिपक्षीय SoO समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता एक वर्ष के लिए प्रभावी किया गया था। संशोधित नियमों में मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता और स्थायी शांति के लिए बातचीत से समाधान तलाशने की जरूरत को दोहराया गया। नई शर्तों के तहत KNO और UPF ने संघर्ष की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों से सात निर्धारित कैंपों को दूसरी जगह ले जाने, कैंपों की संख्या कम करने और हथियारों को नजदीकी CRPF या BSF कैंपों के पास स्थानांतरित करने पर सहमति जताई। कैडरों का कड़ा भौतिक सत्यापन करने का प्रावधान भी रखा गया।
मणिपुर संघर्ष में क्यों महत्वपूर्ण है SoO?
मणिपुर में मई 2023 के बाद शुरू हुई जातीय हिंसा के संदर्भ में SoO राजनीतिक और सुरक्षा बहस का अहम मुद्दा रहा है। समझौते में शामिल समूहों द्वारा नियमों के पालन और कथित उल्लंघनों को लेकर अलग-अलग पक्षों ने आरोप लगाए हैं। इसलिए SoO का मुद्दा केवल सुरक्षा अभियान रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में शांति वार्ता और राजनीतिक समाधान की प्रक्रिया से भी जुड़ा है।
संशोधित समझौते में Joint Monitoring Group को नियमों के पालन की करीबी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई और उल्लंघन होने पर समझौते की समीक्षा सहित कार्रवाई का प्रावधान रखा गया। इसलिए मणिपुर के संदर्भ में SoO को सीधे शब्दों में समझें तो यह हथियारबंद संघर्ष को नियंत्रित करते हुए बातचीत का रास्ता खुला रखने की व्यवस्था है। यह स्थायी शांति समझौता नहीं, बल्कि हिंसा रोकने और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का एक ढांचा है।