इंफाल: मणिपुर में हिंसा की ताजा घटनाओं ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और शांति बहाली की कोशिशों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। कांगपोकपी जिले में मंगलवार, 20 अक्टूबर को कुकी-जो समुदाय के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे एक दिन पहले तीन मैतेई ग्रामीणों की हत्या हुई थी। इन घटनाओं के बीच इंफाल घाटी के पांच जिलों में 48 घंटे के बंद से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। दुकानें, बाजार और शिक्षण संस्थान बंद रहे, जबकि सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित रहा। 
पुलिस के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब आठ बजे पी मोल्डिंग गांव के पास जंगल में गोलीबारी हुई। मृतक की पहचान 45 वर्षीय पाओलेन खोंगसाई के रूप में हुई है। वह एक अन्य व्यक्ति के साथ बांस की कोपलें इकट्ठा करने गए थे। इसी दौरान हथियारबंद हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। खोंगसाई की घटनास्थल पर मौत हो गई, जबकि साथ गया व्यक्ति बच निकलने में सफल रहा। हत्या की इस घटना ने पहले से तनाव झेल रहे इलाके में लोगों की चिंता बढ़ा दी है। 
इससे पहले सोमवार को इंफाल ईस्ट और कांगपोकपी की सीमा से लगे जंगल में ग्रामीणों पर हमला हुआ था। संदिग्ध उग्रवादियों की गोलीबारी में तीन मैतेई ग्रामीणों की मौत और तीन अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। ग्रामीण जंगल में जलावन की लकड़ी लेने गए थे। घटना के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारी दो मृतकों के शव लेकर मुख्यमंत्री आवास के बाहर पहुंचे और अपनी नाराजगी जताई। लगातार हुई हत्याओं ने विभिन्न समुदायों के बीच तनाव और गहरा कर दिया है। 
तीन ग्रामीणों की हत्या के विरोध में बुलाए गए बंद का असर इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग जिलों में दिखाई दिया। मंगलवार को इन जिलों में बाजारों की सामान्य चहल-पहल गायब रही। शिक्षण संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा सरकारी और निजी कार्यालयों का कामकाज प्रभावित हुआ। बंद के कारण रोजमर्रा की गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ा। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। 
नेटिव पीपल कमेटी मणिपुर की ओर से बुलाए गए बंद के दौरान इंफाल ईस्ट और इंफाल वेस्ट के कुछ हिस्सों में रास्ते रोके गए। सार्वजनिक परिवहन के वाहन सड़कों से दूर रहे। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों सहित अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन हुए। हालांकि, पुलिस के अनुसार मंगलवार को बंद प्रभावित इलाकों से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। इससे अलग राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में सामने आई हिंसा और आगजनी की घटनाओं ने स्थिति को जटिल बनाए रखा। 
सोमवार रात इंफाल वेस्ट के क्वाकैथेल और चिंगमेइरोंग तथा इंफाल ईस्ट के खुरई लामलोंग में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाए थे। इससे आवाजाही बाधित हुई। मंगलवार सुबह भी कई स्थानों पर बंद समर्थक सक्रिय रहे। दुकानों और बाजारों के बंद रहने के साथ रास्तों पर अवरोध ने घाटी के जिलों में सामान्य गतिविधियों को प्रभावित किया। 
इस बीच पहाड़ी जिलों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं। कामजोंग जिले के एक पहाड़ी गांव में कम से कम 15 घर जलाए जाने की जानकारी अधिकारियों ने दी थी। ये घर कुकी समुदाय के लोगों के बताए गए। आगजनी के कारण कई ग्रामीणों को अपना घर छोड़कर जंगल और नजदीकी सेना शिविर की ओर जाना पड़ा। घरों को नुकसान पहुंचने तथा लोगों के सुरक्षित स्थानों की तलाश में निकलने से क्षेत्र में असुरक्षा की स्थिति बनी हुई है।  हिंसा के बीच मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने तीन नागरिकों की हत्या की निंदा की और अधिकारियों को सतर्कता बढ़ाने को कहा। प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान तथा हेलीकॉप्टर से निगरानी की जानकारी भी सामने आई है। लगातार हो रही घटनाओं के बीच प्रशासन के सामने ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, हमलावरों की पहचान करने और प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल करने की चुनौती बनी हुई है।
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