बिमोल अकोइजाम को राहत, 7 दिन पहले देना होगा नोटिस
सांसद को अंतरिम सुरक्षा
गुवाहाटी: दिल्ली की एक अदालत ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में कांग्रेस सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि उन्हें गिरफ्तार करने से पहले सात दिन का नोटिस दिया जाए। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिगविनय सिंह ने गुरुवार को यह आदेश पारित किया। जांच के दौरान यह सुरक्षा लागू रहेगी, बशर्ते कि अगर पुलिस इस मामले में अकोइजम को गिरफ्तार करना चाहती है, तो उन्हें सात दिन का नोटिस दे।
कई छात्रों ने कांग्रेस सांसद पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इन शिकायतों के आधार पर, दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75 के तहत FIR दर्ज की है, जो यौन उत्पीड़न से संबंधित है। अकोइजम की याचिका पर सुनवाई करते हुए, अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि वे जांच में सहयोग कर रहे हैं, उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे जांच एजेंसी के सामने पेश भी हुए हैं। अदालत ने यह भी गौर किया कि जांच अभी चल रही है और पुलिस ने अभी तक शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज नहीं किए हैं। अदालत को बताया गया कि बयान इसलिए दर्ज नहीं किए जा सके क्योंकि JNU ने शिकायतकर्ताओं के नाम और अन्य विवरण उपलब्ध नहीं कराए हैं। अकोइजम के वकील ने अदालत को बताया कि सांसद जांच एजेंसी के सामने पेश हुए हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
सरकारी वकील ने कहा कि पुलिस ने शिकायतकर्ताओं के बारे में जानकारी मांगने के लिए JNU को पत्र लिखा है। विश्वविद्यालय से विवरण मिलने के बाद, पुलिस छात्रों से संपर्क करके उनके बयान दर्ज करेगी। न्यायाधीश ने कहा कि अगर अकोइजम जांच में सहयोग नहीं करते हैं, तो पुलिस आगे के निर्देशों के लिए अदालत का रुख कर सकती है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब इन आरोपों के बाद JNU द्वारा अकोइजम की सेवाएं समाप्त करने के फैसले को लेकर एक अलग कानूनी विवाद भी चल रहा है। शिकायतों की जांच के बाद, विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर को उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था। अकोइजम ने दिल्ली उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 2 नवंबर को बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगा दी।