मणिपुर: कांग्रेस नेताओं ने 2 नवंबर को नई दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस बैठक में राज्य में जारी अशांति और 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों पर चर्चा की गई।
इस बैठक में मणिपुर कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नेता केइशम मेघचंद्र, राज्य कांग्रेस अध्यक्ष ओ. इबोबी सिंह, मणिपुर के लिए AICC प्रभारी सप्तगिरी शंकर उलाका और पार्टी के अन्य नेता शामिल हुए।
सोशल मीडिया पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए मेघचंद्र ने बताया कि चर्चा मुख्य रूप से राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था, लगातार हो रही हिंसा और असुरक्षा पर केंद्रित रही। उन्होंने कहा कि मणिपुर में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में विफलता रही है।
उन्होंने कहा, "बैठक में मणिपुर की मौजूदा कानून-व्यवस्था, लगातार हो रही हिंसा और असुरक्षा, तथा राज्य में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में रही विफलता पर चर्चा की गई।"
नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस संगठन की तैयारियों और चुनावी रणनीति की भी समीक्षा की।
मेघचंद्र ने कहा, "हमने आगामी मणिपुर विधानसभा चुनाव और कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारियों तथा रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की।"
पार्टी की प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि मणिपुर की जनता "शांति, सुरक्षा, स्थिरता और जवाबदेह शासन" की हकदार है। उन्होंने आगे कहा कि "मणिपुर का भविष्य और वहां स्थायी शांति बहाल करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं।"
मणिपुर मई 2023 से जातीय हिंसा से जूझ रहा है। तब घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच झड़पें शुरू हुई थीं। इस संघर्ष में कम से कम 306 लोगों की जान गई है, 49 लोग लापता हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। हाल ही में कुकी और नागा समुदायों के बीच भी झड़पों की खबरें सामने आई हैं।
कांग्रेस नेताओं की यह बैठक, नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की रैली में शामिल होने के एक दिन बाद हुई। पार्टी के एक पदाधिकारी के अनुसार, रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मणिपुर कांग्रेस के नेताओं ने "मणिपुर बचाओ" के नारे लगाए।
'इंडिया' गठबंधन की इस रैली में कई विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने केंद्र और कई राज्यों में "चुराए गए" जनादेश के ज़रिए सरकारें बनाई हैं।
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