गुवाहाटी: मणिपुर में सार्वजनिक व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए, राज्य सरकार ने 11 मई को मोबाइल डेटा और ब्रॉडबैंड सेवाओं सहित इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को पांच दिनों के लिए बढ़ाने का आदेश दिया.
सरकार का यह कदम राज्य में रहने वाले प्रमुख समुदायों के स्वयंसेवकों/युवाओं के बीच हिंसा और आगजनी की खबरों के बीच आया है।
आदेश में कहा गया है कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि के माध्यम से गलत सूचनाओं और झूठी अफवाहों के प्रसार को रोककर जनहित में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त उपाय करना आवश्यक हो गया है।
आदेश के अनुसार, "भड़काऊ सामग्री और झूठी अफवाहों के परिणामस्वरूप, जीवन के नुकसान और / या सार्वजनिक / निजी संपत्ति को नुकसान होने और सार्वजनिक शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए व्यापक गड़बड़ी का आसन्न खतरा है, जो प्रसारित हो सकता है।" / मोबाइल सेवाओं, एसएमएस सेवाओं और डोंगल सेवाओं पर सोशल मीडिया/संदेश सेवाओं के माध्यम से जनता को प्रसारित किया जाता है।
बयान के अनुसार उपरोक्त आदेश के उल्लंघन का दोषी पाया गया कोई भी व्यक्ति कानूनी कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा।
मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में 3 मई को 10 पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद मणिपुर में हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें कम से कम 54 लोगों की मौत हो गई। हिंसा की छिटपुट घटनाओं के बीच राज्य धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है और राहत कार्य पूरे जोरों पर हैं।
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