इंफाल: मणिपुर इंटीग्रिटी पर कोऑर्डिनेटिंग कमेटी (COCOMI) ने भारत सरकार से मांग की है कि वह म्यांमार में मौजूद उग्रवादियों द्वारा स्थानीय निवासियों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोके।
कमेटी ने केंद्र पर उग्रवाद-विरोधी अभियानों के बहाने विदेशी उग्रवादियों को बचाने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो जनता में गुस्सा बढ़ सकता है।
अपने बयान में, COCOMI ने आरोप लगाया कि भारत की उग्रवाद-विरोधी नीति मणिपुर की मूल आबादी को दबाने के लिए म्यांमार स्थित सशस्त्र समूहों का इस्तेमाल करती है।
उसने दावा किया कि ये समूह स्थानीय समुदायों को विस्थापित करने और उनकी ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, और 'सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन्स' (SoO) समझौता उन्हें सुरक्षा देता है।
कमेटी ने नई दिल्ली पर इन समूहों को लॉजिस्टिकल और सैन्य सहायता देने और जिसे उसने सुनियोजित हमला बताया, उसे सांप्रदायिक हिंसा के तौर पर पेश करने का भी आरोप लगाया।
COCOMI ने सीमा पार से घुसपैठ के सबूत के तौर पर स्थानीय नेताओं के बयानों और पुलिस की कार्रवाई का हवाला दिया। उसने कहा कि विधायक लीशियो कीशिंग ने पहले ही म्यांमार स्थित कुकी नेशनल आर्मी (बर्मा) या KNA(B) को नामली, वांगली, चोरो और पिलोंग गांवों पर हमलों के लिए ज़िम्मेदार बताया था।
कमेटी ने निंगचू में हुए हमले को लेकर राज्य पुलिस द्वारा दर्ज हालिया मामले का भी ज़िक्र किया, जिसे KNA(B) द्वारा सशस्त्र घुसपैठ के तौर पर वर्गीकृत किया गया था।
COCOMI के अनुसार, इस घटना में विदेशी कैडरों को नुकसान पहुंचा था।
कमेटी ने सीमा की स्थिति से निपटने के तरीके को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की आलोचना भी की। उसने असम राइफल्स की भूमिका पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित रखने में उनकी विफलता ने जनता का भरोसा कम कर दिया है।
COCOMI ने आगे दावा किया कि गवाहों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों को विदेशी उग्रवादियों की सुरक्षा करते देखा है, जबकि सीमावर्ती गांवों को नष्ट किया जा रहा था।
कमेटी ने राज्य सरकार पर घुसपैठ को नज़रअंदाज़ करने और साथ ही अपने घरों की रक्षा कर रहे स्थानीय स्वयंसेवकों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
उसने चेतावनी दी कि अगर स्थिति को लेकर जनता का गुस्सा कानून-व्यवस्था बिगड़ने का कारण बनता है, तो इसके लिए "डबल-इंजन" सरकार ज़िम्मेदार होगी।
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