Manipur में 5 दिन का शटडाउन चौथे दिन भी जारी, जनजीवन प्रभावित, इमा मार्केट में आंशिक राहत
Manipur मणिपुर: Manipur के कई जिलों में पांच दिन के पूर्ण बंद (टोटल शटडाउन) का असर बुधवार, 22 अप्रैल को चौथे दिन भी जारी रहा। इस बंद के चलते राज्य में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाजार, शैक्षणिक संस्थान और परिवहन सेवाएं अधिकांश जगहों पर पूरी तरह ठप रही।
यह शटडाउन हाल ही में ट्रोंगलाओबी में हुए बम हमले के विरोध में बुलाया गया था। इस हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई थी। घटना के बाद से ही राज्य के कई हिस्सों में विरोध और बंद का माहौल बना हुआ है।
बंद के कारण सड़कों पर आम दिनों की तुलना में सन्नाटा देखा गया। कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे और स्कूल-कॉलेजों में भी उपस्थिति नहीं के बराबर रही। प्रशासनिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा है।
हालांकि, राज्य के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों में से एक Ima Keithel (ख्वाइरमबंद इमा मार्केट) में चौथे दिन आंशिक गतिविधि देखने को मिली। यहां कुछ महिला विक्रेताओं ने आर्थिक मजबूरी का हवाला देते हुए आवश्यक वस्तुओं की बिक्री फिर से शुरू की।
कई विक्रेताओं ने कहा कि वे विरोध का समर्थन करते हैं, लेकिन लगातार बंद के कारण उनकी रोज़ी-रोटी पर गंभीर असर पड़ रहा है। रोजाना कमाई पर निर्भर परिवारों के लिए लंबे समय तक कारोबार बंद रखना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय विक्रेता अनीता, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से बाजार में काम कर रही हैं, ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई आंदोलनों में भाग लिया है, लेकिन मौजूदा स्थिति में उन्हें अपनी दुकान दोबारा खोलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि यह समय समाज के सभी वर्गों के लिए कठिन है और स्थिति का जल्द समाधान जरूरी है।
अनीता ने कहा, “मैं जरूरत के अनुसार ही सामान बेच रही हूं। मेरा समर्थन आंदोलन के साथ है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना अब मुश्किल हो गया है।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के लंबे शटडाउन से जहां एक ओर विरोध का संदेश जाता है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक गतिविधियां और आम जीवन बुरी तरह प्रभावित होते हैं। कई लोगों ने मांग की है कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए।
फिलहाल, राज्य के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि हालात को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन तनाव अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
विश्लेषकों के अनुसार, लगातार बंद और विरोध प्रदर्शन का असर राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन दोनों पर पड़ रहा है। ऐसे में संतुलित समाधान और संवाद की भूमिका अहम हो जाती है।