मणिपुर: कांग्रेस ने भाजपा पर मणिपुर के लंबे समय से चल रहे संकट को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सत्ताधारी दल की "संवेदनहीनता" और "घोर अक्षमता" ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती राज्य को और अधिक अस्थिरता की ओर धकेल दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद ये आरोप लगाए। इस बैठक में राज्य के बिगड़ते हालात और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर
चर्चा की गई
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बैठक में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल, मणिपुर के लिए AICC प्रभारी सप्तगिरी उलाका, पूर्व मुख्यमंत्री और मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष इबोबी सिंह, तथा कांग्रेस विधायक दल के नेता के. मेघचंद्र सहित कई अन्य नेता शामिल हुए।
'X' (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में खड़गे ने आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व राज्य में बिगड़ी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने में विफल रहा है और संकट गहराने के बावजूद जवाबदेही से बचता रहा है।
उन्होंने कहा कि मणिपुर की जनता शांति, स्थिरता, सम्मान और न्याय की हकदार है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों के जरिए राज्य में भाजपा के शासन को खत्म करने और शांति, आपसी मेल-मिलाप तथा विकास को बहाल करने की दिशा में काम करेगी।
वेणुगोपाल ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि रविवार को रामलीला मैदान में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की रैली में दिखा गुस्सा, मणिपुर और उत्तराखंड सहित भाजपा शासित राज्यों में सरकार के खिलाफ मौजूद व्यापक असंतोष को दर्शाता है।
उन्होंने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "नफरत, लूट, जमीन पर कब्जा और पूरी तरह से कुशासन - ये सब इन राज्यों में भाजपा के 'ट्रबल इंजन' (समस्या पैदा करने वाले) मॉडल की पहचान हैं।"
मणिपुर में जारी जातीय तनाव का जिक्र करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि राज्य अभी भी इस संघर्ष से जूझ रहा है। उन्होंने दावा किया कि 2024 के आम चुनावों में मतदाताओं ने मणिपुर की दोनों लोकसभा सीटों पर भाजपा को नकार दिया है।
उनके ये बयान राज्य के कुछ हिस्सों में फिर से भड़की अशांति के बीच आए हैं। रविवार रात कांगपोकपी जिले के कई इलाकों में विरोध-प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और लकड़ी के लट्ठों तथा पत्थरों से सड़कें जाम कर दीं। बाद में पुलिस ने कुछ अवरुद्ध रास्तों को साफ कराया।
यह अशांति हाल ही में लापता हुए दो युवाओं के क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद भड़की है। अधिकारियों ने बताया कि रविवार सुबह सेनापति जिले के पहाड़ी इलाके में उनके शव मिले।
इस साल फरवरी में कुकी और नागा समुदायों के बीच झड़पें शुरू होने के बाद से तामेंगलोंग, नोनी, कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में 50 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और दर्जनों घर जला दिए गए हैं।
यह ताजा हिंसा इम्फाल घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और मुख्य रूप से आसपास के पहाड़ी जिलों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच चल रहे बड़े जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुई है।
मई 2023 में शुरू हुए इस संघर्ष में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, 49 लोग लापता हो गए और हजारों लोग बेघर हो गए।
अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए, कांग्रेस ने मणिपुर में भाजपा को चुनौती देने के लिए कानून-व्यवस्था के मौजूदा संकट को एक अहम मुद्दा बनाने की कोशिश की है।
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