इंफाल। मणिपुर में हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं के बीच उग्रवादी संगठनों और उनसे जुड़े कैडरों की गतिविधियां केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं। सुरक्षा एवं प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय एजेंसियां स्थानीय खुफिया तंत्र और सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर विभिन्न संगठनों की गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं जुटा रही हैं। खुफिया जानकारी के आधार पर संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में तलाशी तथा सुरक्षा अभियान तेज किए जा सकते हैं।

राज्य में लंबे समय से बनी सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अलग-अलग स्तर पर निगरानी कर रही हैं। खासकर उन इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां पहले उग्रवादी गतिविधियां, हथियारों की आवाजाही या हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में गतिविधियों पर नजर रखने के लिए केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मणिपुर पुलिस की हालिया आधिकारिक जानकारियों में भी प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े संदिग्ध कैडरों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहने की बात सामने आई है। पुलिस ने सितंबर में अलग-अलग अभियानों में प्रतिबंधित संगठनों से कथित रूप से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है। इन मामलों में आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की प्रक्रिया से तय होगी।

सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति में केवल संदिग्ध कैडरों की पहचान ही नहीं, बल्कि हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी भी प्रमुख है। राज्य में पूर्व में हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में हथियार लूटे जाने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद से सुरक्षा बल लगातार अवैध हथियारों की बरामदगी और हथियार जमा कराने के अभियान चला रहे हैं। गृह मंत्रालय ने भी मणिपुर में अवैध और लूटे गए हथियारों की बरामदगी को कानून-व्यवस्था बहाल करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।

राज्य के पहाड़ी और घाटी वाले इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के लिए अलग तरह की चुनौतियां पैदा करती हैं। कई इलाके दुर्गम हैं और कुछ क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब स्थित हैं। ऐसे में खुफिया जानकारी के आधार पर लक्षित अभियान चलाने पर जोर दिया जाता है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को कम से कम परेशानी पहुंचाते हुए संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई करना है।

मणिपुर की सीमा म्यांमार से लगती है। इस कारण सीमा पार आवाजाही, हथियारों और अन्य अवैध सामग्री की तस्करी से जुड़े जोखिम भी सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी का हिस्सा हैं। केंद्र सरकार ने भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सीमा पर बाड़ लगाने की योजना पर काम किया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक मणिपुर सहित पूर्वोत्तर के सीमावर्ती राज्यों में सीमा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय खुफिया नेटवर्क इस पूरी व्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है। स्थानीय स्तर से मिलने वाली जानकारी को केंद्रीय एजेंसियों की सूचनाओं के साथ मिलाकर संदिग्ध गतिविधियों का आकलन किया जाता है। इसके आधार पर यह तय किया जा सकता है कि किस इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने, तलाशी अभियान चलाने या निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है।

हालांकि किसी भी संभावित अभियान की विस्तृत जानकारी सुरक्षा कारणों से पहले सार्वजनिक नहीं की जाती। इसलिए संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों में अभियान तेज होने की संभावना को सुरक्षा तैयारियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। किसी विशेष संगठन या स्थान के खिलाफ आगामी कार्रवाई के बारे में आधिकारिक घोषणा के बिना निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।

मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा और तनाव की स्थिति ने कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी की है। हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा। इसके बाद राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई। हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा चौकियां, गश्त और तलाशी अभियान भी लगातार चलाए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था के साथ प्रशासन के सामने विस्थापित लोगों के पुनर्वास और सामान्य स्थिति बहाल करने की चुनौती भी है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की कोशिश हिंसक गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के साथ उन तत्वों पर कार्रवाई करने की है जो कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं।

केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों से सामने आने वाली सूचनाओं का सत्यापन भी महत्वपूर्ण है। तनावपूर्ण परिस्थितियों में अफवाह या गलत सूचना तेजी से फैल सकती है और इससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। प्रशासन समय-समय पर लोगों से अपुष्ट खबरों पर भरोसा नहीं करने और किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को देने की अपील करता रहा है।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हथियारों की बरामदगी, संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी और उग्रवादी संगठनों से कथित संबंधों की जांच जैसे कदम शामिल हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी और अन्य केंद्रीय एजेंसियां गंभीर हिंसक घटनाओं से जुड़े कुछ मामलों की अलग-अलग जांच भी करती रही हैं। प्रत्येक मामले में आरोपी और आरोपों की कानूनी स्थिति अलग होती है, इसलिए गिरफ्तारी को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।

मणिपुर में शांति बहाली के लिए सुरक्षा कार्रवाई के साथ राजनीतिक और प्रशासनिक प्रयास भी जारी हैं। केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न समुदायों के बीच संवाद तथा सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिशों की जानकारी समय-समय पर सामने आती रही है।

फिलहाल केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय खुफिया इकाइयों का मुख्य जोर संवेदनशील गतिविधियों की समय रहते जानकारी जुटाने और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय पर है। खुफिया इनपुट के आधार पर जरूरत पड़ने पर संवेदनशील तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी, गश्त और लक्षित अभियान बढ़ाए जा सकते हैं। हालांकि किसी संभावित कार्रवाई का दायरा और समय सुरक्षा परिस्थितियों तथा आधिकारिक निर्णय पर निर्भर करेगा।

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