इंफाल: मणिपुर के नोनी जिले में सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी में कुकी-जो समुदाय के तीन लोगों की मौत हो गई। घटना शनिवार, 31 अक्टूबर को नुंगबा क्षेत्र के केकरू नागा गांव में हुई। पुलिस ने गोलीबारी और तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। हालांकि, गोलीबारी की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें शामिल हथियारबंद लोगों की पहचान क्या है, इसे लेकर पुलिस ने शुरुआती बयान में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। 

इस घटना को लेकर कुकी आदिवासी संगठन कुकी इनपी मणिपुर यानी केआईएम ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने मृतकों को गांवों की सुरक्षा में लगे स्वयंसेवक बताया है। उसने आरोप लगाया कि नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम के इसाक-मुइवा गुट यानी एनएससीएन-आईएम और जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट के कामसन गुट यानी जेडयूएफ-के के सशस्त्र सदस्यों ने उनकी हत्या की। हालांकि, पुलिस ने अपने बयान में किसी संगठन को घटना के लिए जिम्मेदार घोषित नहीं किया है। ऐसे में संगठन के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। 
केआईएम ने राज्य सरकार और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि नोनी जिले में कुकी-जो समुदाय के संवेदनशील गांवों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई। उसके अनुसार, संभावित खतरे को लेकर पहले भी चेतावनियां दी गई थीं, लेकिन सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय लोगों को अपने घरों और गांवों की रक्षा के लिए स्वयंसेवक के रूप में आगे आना पड़ा। यह संगठन का पक्ष है, जिस पर प्रशासन की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। 
संगठन के सूचना एवं प्रचार सचिव जांगहाओलुन हाओकिप ने घटना पर दुख जताते हुए प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। केआईएम ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और संवेदनशील बस्तियों को हथियारबंद गतिविधियों से बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। संगठन ने जिम्मेदार लोगों की पहचान, जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग भी रखी है। उसने यह भी कहा कि आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावित इलाकों की सुरक्षा संबंधी जरूरतों पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक है। 
पुलिस के अनुसार, घटना से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल सामने आए पुलिस के विवरण और कुकी संगठन के बयान में घटना के स्वरूप को लेकर अंतर है। पुलिस ने इसे हथियारबंद समूहों के बीच गोलीबारी बताया है, जबकि केआईएम ने तीन स्वयंसेवकों की हत्या का आरोप लगाया है। मृतकों की भूमिका और गोलीबारी में शामिल लोगों को लेकर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। किसी संगठन के आरोप के आधार पर पूरे समुदाय को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने का आधार नहीं है। नोनी की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब राज्य में शांति, सुरक्षा और विस्थापित लोगों के पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। शनिवार को राजधानी इंफाल में हजारों लोगों ने रैली में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय से जारी संकट का स्थायी समाधान निकालने, हिंसा पीड़ितों को न्याय दिलाने और अपने घरों से विस्थापित लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की। रैली में कुकी सशस्त्र समूहों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस यानी एसओओ समझौते को समाप्त करने की मांग भी उठाई गई। 
इंफाल की रैली का आयोजन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी यानी कोकोमी ने किया था। रैली क्वाकीथेल स्थित टिडिम ग्राउंड से शुरू होकर थांगमेइबंद के थाउ ग्राउंड पहुंची, जहां सार्वजनिक सभा हुई। यूनाइटेड नागा काउंसिल और उससे जुड़े संगठनों ने भी इस आयोजन का समर्थन किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था तथा हिंसा से प्रभावित परिवारों के भविष्य को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। इन मांगों के बीच नोनी में हुई तीन मौतों ने नागरिक सुरक्षा से जुड़े सवालों को और गंभीर बना दिया है। 
इसी दिन सेनापति में भी रैली निकाली गई। वहां प्रदर्शनकारियों ने एसओओ समझौता खत्म करने, सीमावर्ती तथा संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से असम राइफल्स को हटाने और 26 सितंबर के गुवाहाटी त्रिपक्षीय समझौते को तय समय में लागू करने की मांग की। अलग-अलग स्थानों पर सामने आई इन मांगों से स्पष्ट है कि राज्य के विभिन्न संगठन सुरक्षा और राजनीतिक समाधान को लेकर अपना पक्ष रख रहे हैं। हालांकि, इन प्रदर्शनों और नोनी की गोलीबारी के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं की गई है। नोनी मामले में अब पुलिस के विस्तृत घटनाक्रम और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। गोलीबारी की वजह, शामिल हथियारबंद लोगों की पहचान और तीनों मौतों की परिस्थितियों को स्पष्ट करना जरूरी होगा। फिलहाल पुलिस ने इलाके में आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने की जानकारी दी है। दूसरी ओर, केआईएम प्रभावित परिवारों के लिए न्याय और संवेदनशील गांवों में बेहतर सुरक्षा की मांग पर कायम है। घटना से संबंधित आगे की आधिकारिक जानकारी मिलने पर ही आरोपों और शुरुआती विवरण की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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