इंफाल: मणिपुर में जनगणना और नागरिकता से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री द्वारा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की मांग का समर्थन किए जाने के बाद एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के लिए रवाना हुआ है। प्रतिनिधिमंडल केंद्र सरकार के सामने राज्य से जुड़े मुद्दों को रखने की तैयारी में है।

जानकारी के अनुसार, मणिपुर में जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध प्रवासियों की पहचान को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। मुख्यमंत्री ने राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए NRC लागू करने की मांग का समर्थन किया है। इसके बाद इस मुद्दे को लेकर विभिन्न संगठनों और नेताओं की गतिविधियां तेज हो गई हैं।
दिल्ली रवाना हुए प्रतिनिधिमंडल में राज्य के सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधि शामिल बताए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित मंत्रालयों के सामने मणिपुर की स्थिति और मांगों को रखना है।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि राज्य की पहचान, सुरक्षा और संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए नागरिकों की सही पहचान जरूरी है। उनका तर्क है कि NRC जैसी प्रक्रिया से वास्तविक नागरिकों और अवैध प्रवासियों के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सकेगा।
वहीं, इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग NRC को राज्य की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए जरूरी बता रहे हैं, जबकि कुछ समूह इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जता रहे हैं।
मणिपुर पहले से ही जातीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर चुका है। ऐसे में नागरिकता और जनगणना से जुड़े फैसलों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रतिनिधिमंडल की दिल्ली यात्रा को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है। मणिपुर में NRC का मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति और प्रशासनिक फैसलों पर बड़ा असर डाल सकता है।
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