नई दिल्ली/इंफाल: अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि गृह मंत्रालय (MHA) ने मणिपुर के ज़्यादातर हिस्सों, नागालैंड के कई ज़िलों और अरुणाचल प्रदेश के कुछ ज़िलों में आर्म्ड फोर्सेज़ (स्पेशल पावर्स) एक्ट, 1958 (AFSPA) को और छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी तीन अलग-अलग नोटिफिकेशन्स के मुताबिक, इस स्पेशल कानून की समय-सीमा 1 अक्टूबर से आगे बढ़ाई जाएगी।
AFSPA, जो नोटिफाइड अशांत इलाकों में काम कर रही आर्म्ड फोर्सेज़ को तलाशी लेने, गिरफ़्तार करने और ज़रूरत पड़ने पर गोली चलाने की व्यापक शक्तियां देता है (अगर उन्हें "कानून-व्यवस्था बनाए रखने" के लिए यह ज़रूरी लगे), उसे गुरुवार को पूरे मणिपुर राज्य में छह और महीनों के लिए बढ़ा दिया गया। हालांकि, इसमें पांच ज़िलों – इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग – के 13 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों को शामिल नहीं किया गया है।
मणिपुर के कुल 16 ज़िलों में से ये पांच ज़िले इंफाल घाटी क्षेत्र में स्थित हैं।
3 मई, 2023 से मणिपुर में बहुसंख्यक मैतेई और अल्पसंख्यक कुकी-ज़ो-हमार आदिवासियों के बीच जातीय हिंसा से भारी तबाही मची है। मई 2023 से चली आ रही इस लंबी जातीय हिंसा, जिसमें 260 से ज़्यादा लोगों की जान गई, के बाद 13 फरवरी, 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। यह कदम मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह (जो दूसरी बार BJP के नेतृत्व वाली सरकार चला रहे थे) के 9 फरवरी को इस्तीफ़ा देने के चार दिन बाद उठाया गया था। इस साल 4 फरवरी को युमनाम खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया था। इम्फाल में अधिकारियों ने बताया कि AFSPA, 1958 की धारा 3 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद MHA का यह नोटिफिकेशन जारी किया गया।
MHA के एक और नोटिफिकेशन में कहा गया है कि नागालैंड के नौ ज़िलों — दीमापुर, न्यूलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफायर, नोकलाक, फेक, पेरेन और मेलुरी — और पांच अन्य ज़िलों — कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेन्ग, वोखा और ज़ुन्हेबोतो — के 21 पुलिस स्टेशनों वाले इलाकों में AFSPA को छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है और इन इलाकों को 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया गया है।
MHA के एक और नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग ज़िलों और असम की सीमा से लगे राज्य के नामसाई ज़िले में नामसाई, महादेवपुर और चौकखम पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों में भी AFSPA को बढ़ाया गया है। इन इलाकों को 1 अक्टूबर से छह महीने की अवधि के लिए 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया गया है।
सरकार ने नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के उन इलाकों में कानून-व्यवस्था की स्थिति की भी समीक्षा की, जहां AFSPA को बढ़ाया गया है। मणिपुर (जिसमें मणिपुरी स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF), नुपी खुनाई-याइरीपोक और मीरा पाइबीस शामिल हैं) और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के कई संगठन समय-समय पर अपने राज्यों से AFSPA को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन करते रहे हैं।
इस बीच, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले कहा था कि MHA ने उनके राज्य के कई हिस्सों से AFSPA हटा लिया है। AFSPA को मूल रूप से 1990 में पूरे असम में लागू किया गया था, जब यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम (ULFA) के नेतृत्व में उग्रवादी गतिविधियां चरम पर थीं। तब से, इसे हर छह महीने में बढ़ाया जाता रहा है, और सुरक्षा की मौजूदा स्थिति के आधार पर समय-समय पर समीक्षा करके कुछ इलाकों को धीरे-धीरे इससे बाहर किया जाता रहा है। सुरक्षा हालात में काफ़ी सुधार के बाद, त्रिपुरा से 2015 में, मेघालय से 2018 में और मिज़ोरम से 1980 के दशक में AFSPA हटा लिया गया था।
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