Maharashtra महाराष्ट्र: पुणे शहर के लिए पीने के पानी का प्रमुख स्रोत खड़कवासला डैम में इस साल जल भंडारण स्तर चिंताजनक रूप से कम हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि डैम में पानी का स्टोरेज पिछले लगभग एक दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे शहर की जल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हालांकि पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश ने कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन इसका असर अभी जलाशयों में पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। खासकर वरसगांव डैम में पानी के बहाव में धीरे-धीरे सुधार दर्ज किया गया है, जो आने वाले दिनों के लिए थोड़ी उम्मीद जगाता है।
सिंचाई विभाग (इरिगेशन डिपार्टमेंट) के आंकड़ों के अनुसार 1 जुलाई तक डैम के कैचमेंट एरिया में केवल हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। टेमघर में 15 मिमी, पानशेत में 10 मिमी, वरसगांव में 13 मिमी और खड़कवासला में केवल 4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि बारिश हुई है, लेकिन जलाशयों में पानी का प्रवाह अपेक्षाकृत कमजोर बना हुआ है।
आंकड़ों के मुताबिक, 1 जुलाई तक चारों प्रमुख डैमों में कुल उपयोग योग्य जल भंडारण केवल 3.66 TMC दर्ज किया गया, जो उनकी कुल क्षमता का मात्र 12.57 प्रतिशत है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि यह स्तर सामान्य आपूर्ति बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है।
इसके विपरीत, पिछले वर्ष इसी अवधि में जलाशयों में पानी की स्थिति काफी बेहतर थी। उस समय कुल उपयोग योग्य स्टोरेज 14.90 TMC था, जो कुल क्षमता का 51.12 प्रतिशत था। इस तुलना से स्पष्ट है कि इस वर्ष पानी के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले हफ्तों में बारिश की गति तेज नहीं हुई, तो पुणे शहर में पानी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। शहर की बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए यह स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन ने भी हालात पर नजर रखना शुरू कर दिया है और जल उपयोग को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है। नागरिकों से पानी की बचत करने और अनावश्यक उपयोग से बचने का आग्रह किया गया है।
हालांकि हाल की बारिश ने कैचमेंट एरिया में कुछ सुधार के संकेत दिए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभी पर्याप्त नहीं है। लगातार और अच्छी बारिश ही जलाशयों को सामान्य स्तर तक पहुंचा सकती है।
कुल मिलाकर, पुणे में पानी का मौजूदा संकट आने वाले दिनों में प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, यदि मानसून की स्थिति में तेजी से सुधार नहीं होता है।