Maharashtra महाराष्ट्र: छोटे से गांव में पढ़ाई कर राज्य, राष्ट्रीय और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परफॉर्म करने वाली युवती का सफर बेहद दिलचस्प है। परिवार की गरीबी पुश्तैनी है। परिवार का मछली पालन का व्यवसाय है। पढ़ाई-लिखाई कोसों दूर है। लेकिन शरीर की जिद ने सुनयना डोंगरे को शांत नहीं बैठने दिया। सेलू के दीपचंद विद्यालय में पढ़ाई के दौरान ही उसने कुछ करने की ठान ली। उसे खेलों में रुचि थी। उसने दौड़ना शुरू किया। वह पदक जीतने लगी और उसका उत्साह बढ़ता गया। उसके पिता विष्णुजी डोंगरे ने उसे भरोसा दिलाया कि यह क्षेत्र उसे नाम रोशन करेगा। वहीं उसकी मां अनीता डोंगरे ने उसे हिम्मत दी। इसी आधार पर सुनयना का चयन वर्धा पुलिस में खेल कोटे से पुलिस कांस्टेबल के पद पर हुआ। 2011 में हुए इस चयन के बाद उसने ड्यूटी के दौरान खेलने का शौक नहीं छोड़ा। बाद में इस सेवा ने आर्थिक तंगी को भी खत्म कर दिया अब क्या, इसी सवाल में कई साल बीत गए।