सनातन संस्कृति और विवाह परंपरा पर स्वामी अवधेशानंद गिरि का जोर

Update: 2026-03-30 16:50 GMT
Mumbai मुंबई: आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर Swami Avdheshanand Giri Maharaj ने भारत की सनातन संस्कृति और विवाह संस्था के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन और शाश्वत संस्कृति ने सदियों से मानव जीवन को दिशा दी है और जीवन की पूर्णता प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विवाह केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार है, जो परिवार और समाज को मजबूत बनाता है। उन्होंने विशेष रूप से सामूहिक विवाह की परंपरा को भारतीय संस्कृति की महान विशेषता बताते हुए कहा कि यह समाज में समानता, सहयोग और सद्भाव को बढ़ावा देती है।
इस अवसर पर देश के पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind भी अपनी पत्नी Savita Kovind और बेटी स्वाति कोविंद के साथ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की।
स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को सकारात्मक संदेश देते हैं और जरूरतमंद परिवारों को सम्मान के साथ विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार को पूरा करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों को संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सामूहिक विवाह जैसे आयोजनों को सामाजिक समरसता और आर्थिक सहयोग का प्रतीक बताया। यह आयोजन न केवल विवाह संस्कार को सरल बनाता है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करता है।
Tags:    

Similar News