मुंबई: शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शायना एनसी ने सोमवार को कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लगता है कि विरोध-प्रदर्शन करना किसी डिलीवरी ऐप पर खाना ऑर्डर करने जैसा है।
शायना ने राजधानी में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए कहा, "राहुल गांधी के लिए, विरोध-प्रदर्शन का आह्वान करना डिलीवरी ऐप पर खाना ऑर्डर करने जैसा है। किसी को विरोध के लिए बुलाओ; हर दिन लोगों के लिए परेशानी खड़ी करो।"
उन्होंने पूछा, "माननीय सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि मामला विचाराधीन है; तो फिर आप सड़कों पर हंगामा क्यों कर रहे हैं और कोर्ट को अपना काम क्यों नहीं करने दे रहे हैं?"
उन्होंने आगे कहा, "राहुल गांधी में सहानुभूति की कमी है और उन्हें आम लोगों की कोई परवाह नहीं है जो राजीव चौक, पटेल चौक, मंडी हाउस, सचिवालय या बाराखंभा रोड जाना चाहते हैं। वे प्रभावित हो रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "प्रदर्शनकारियों को मेट्रो, ट्रैफिक या लोगों की सुरक्षा की कोई परवाह नहीं है।"
उन्होंने आगे कहा, "जब मामला कोर्ट में हो, तो इंतजार करना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए।"
इस बात पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "आप (विपक्ष) कब तक झूठी बातों से लोगों को गुमराह कर पाएंगे? संसद में बहस करने के लिए आपका स्वागत है, लेकिन सड़कों पर अराजकता न फैलाएं।"
शायना ने आगे कहा कि लोग 'ठाकरे' और 'गांधी' जैसे नामों से आकर्षित नहीं होते हैं और विपक्ष के पास कोई विजन, योजना या ब्लूप्रिंट नहीं है।
CJP नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर शायना ने कहा, "हिरासत (detention) और गिरफ्तारी (arrest) के बीच बहुत बड़ा अंतर है। हर किसी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन जब इससे अशांति और दंगे होते हैं, तो पुलिस को भी कार्रवाई करनी पड़ती है।"
उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों को और न भड़काने, भीड़ को नियंत्रित करने और आम जनता की सुरक्षा करने के लिए दिल्ली पुलिस की तारीफ की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश की 'जेन जेड' (Gen Z) से 'विकसित भारत' के साथ मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने और दुनिया को समाधान की ओर ले जाने की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए शायना ने कहा कि भारतीय 'जेन जेड' भविष्य नहीं, बल्कि 'वर्तमान' है। स्टार्टअप इंडिया, MSME और लखपति दीदी जैसी पहलों के ज़रिए प्रधानमंत्री ने सभी को सशक्त बनाया है।
उन्होंने आगे कहा कि देश के युवाओं को विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, न कि अराजकता और अशांति में पड़ना चाहिए। इसके बजाय, यह समझना ज़रूरी है कि आज शिक्षा, सुरक्षा और ‘आत्मनिर्भरता’ की ज़रूरत है।
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