छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में गुरुवार, 29 अक्टूबर की शाम बड़ा निर्माण हादसा हो गया। चिकलथाना इलाके में जालना रोड पर बन रही एक व्यावसायिक इमारत की पहली मंजिल की छत की स्लैब अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय कई मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। स्लैब गिरने का आभास होते ही तीन मजदूर किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि चौथा मजदूर मलबे में दब गया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। तीन मजदूरों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जबकि मलबे में फंसे चौथे मजदूर की तलाश के लिए जेसीबी, क्रेन और अन्य मशीनों की मदद ली गई। शुरुआती जांच में स्लैब को सहारा देने के लिए लगाए गए लोहे के पाइप मुड़ने और निर्माण सामग्री का भार असंतुलित होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, चिकलथाना के साप्ताहिक बाजार के आगे जालना रोड स्थित एक बड़े व्यावसायिक भवन का निर्माण किया जा रहा था। गुरुवार शाम लगभग छह से साढ़े छह बजे के बीच इमारत की पहली मंजिल पर कंक्रीट की स्लैब डालने का काम चल रहा था। इस दौरान निर्माण स्थल पर कई मजदूर मौजूद थे। अचानक स्लैब को सहारा देने वाली संरचना का एक हिस्सा झुक गया और कुछ ही क्षणों में पूरी स्लैब नीचे गिर पड़ी।
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, निर्माणाधीन भवन में लगभग चार हजार वर्ग फुट क्षेत्र में स्लैब डालने की तैयारी की गई थी। इसके लिए लोहे की संरचना और सेंट्रिंग का काम पूरा किया गया था। कंक्रीट डालने के दौरान मजदूर नीचे लगे पाइप और प्लेटों की स्थिति की जांच कर रहे थे। इसी बीच एक तरफ लगा सहारा मुड़ने लगा। मजदूरों ने स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन अचानक निर्माण सामग्री का भार एक ओर बढ़ गया और स्लैब ढह गई।
हादसे के समय नीचे काम कर रहे चार मजदूरों में से तीन ने तत्काल बाहर की ओर छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। हालांकि इस दौरान उन्हें चोटें आईं। चौथा मजदूर समय रहते बाहर नहीं निकल सका और भारी मलबे के नीचे दब गया। घटना के बाद निर्माण स्थल पर अफरातफरी मच गई।
घायल मजदूरों में 25 वर्षीय अशफाक शेख कडू और 35 वर्षीय अंकुश संताराम कांबले की पहचान सामने आई है। अशफाक के सिर में चोट लगने की जानकारी है, जबकि अंकुश को मामूली चोटें आईं। एक अन्य मजदूर को भी उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
हादसे की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग को बुलाया गया। प्रभारी मुख्य अग्निशमन अधिकारी अशोक खांडेकर के नेतृत्व में दमकलकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया और मलबे के नीचे फंसे मजदूर तक पहुंचने का प्रयास किया।
मौके पर मौजूद कंक्रीट और लोहे की भारी संरचना के कारण राहत कार्य में कठिनाई आ रही थी। शुरुआत में मलबा हटाने के प्रयास किए गए, लेकिन स्लैब का आकार बड़ा होने के कारण अतिरिक्त मशीनों की आवश्यकता पड़ी। इसके बाद जेसीबी और बड़ी क्रेन मंगाई गईं।
बचाव दल ने क्रेन की सहायता से लोहे की प्लेटों और अन्य भारी सामग्री को हटाने का प्रयास किया। हालांकि निर्माण सामग्री आपस में फंसी होने के कारण उसे हटाने में समय लग रहा था। रात होने के बाद राहत कार्य के लिए अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था करनी पड़ी।
घटनास्थल पर कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से भी बचाव अभियान में परेशानी आई। बाद में वाहनों की लाइट और अन्य प्रकाश व्यवस्था के सहारे मलबा हटाने का काम जारी रखा गया। रात तक चौथे मजदूर को निकालने के प्रयास जारी थे।
हादसे की जानकारी मिलने पर स्थानीय पुलिस और नगर निगम के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस उपायुक्त रत्नाकर नवले, नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त रणजीत पाटील और अन्य अधिकारियों ने राहत कार्य की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बचाव दल को मलबे में फंसे मजदूर तक पहुंचने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
इस दौरान नगर निगम के महापौर समीर राजूरकर और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से घटना की जानकारी ली और बचाव कार्यों के संबंध में चर्चा की।
पुलिस की शुरुआती पड़ताल में निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपायों की कमी की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुछ मजदूरों के पास सुरक्षा हेलमेट तक नहीं थे। निर्माणाधीन भवन में भारी कंक्रीट डालने के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था थी या नहीं, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
पुलिस ने निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार से भी जानकारी मांगी। शुरुआत में निर्माण स्थल पर कुल कितने मजदूर काम कर रहे थे, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। बाद में ठेकेदार ने 16 मजदूरों में से 15 की पहचान कराई और एक मजदूर के मलबे में फंसे होने की जानकारी दी। इससे बचाव दल को तलाश का दायरा निर्धारित करने में मदद मिली।
घटना के बाद जालना रोड पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए। निर्माणाधीन इमारत की स्लैब गिरने की खबर फैलते ही आसपास के दुकानदार और राहगीर भी घटनास्थल की ओर पहुंचने लगे। लोगों की भीड़ के कारण सड़क पर यातायात प्रभावित हुआ।
पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े। राहत कार्य के दौरान भारी मशीनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए घटनास्थल के आसपास जगह खाली कराई गई। बचाव दल ने लोगों से मलबे और क्षतिग्रस्त संरचना के नजदीक नहीं जाने की अपील की।
इस हादसे ने निर्माणाधीन इमारतों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। किसी भी बड़े निर्माण कार्य में छत की स्लैब डालते समय सेंट्रिंग, शटरिंग और सहायक ढांचे की मजबूती महत्वपूर्ण होती है। कंक्रीट का भार सहारा देने वाली संरचना की निर्धारित क्षमता से अधिक होने या भार असमान रूप से पड़ने पर उसके ढहने का जोखिम बढ़ सकता है।
हालांकि चिकलथाना की इस घटना में स्लैब गिरने का सटीक तकनीकी कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। शुरुआती जानकारी में लोहे के पाइप मुड़ने की बात सामने आई है, लेकिन इसके पीछे डिजाइन, सामग्री, भार वितरण या निर्माण प्रक्रिया से संबंधित कौन-सी कमी थी, इसकी पुष्टि होना बाकी है।
निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों को सुरक्षा हेलमेट, उपयुक्त जूते और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा भारी संरचनाओं के नीचे काम करने से पहले उनकी स्थिरता सुनिश्चित करना जरूरी होता है।
पुलिस और संबंधित विभागों के सामने अब निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की चुनौती है। यह जांच का विषय होगा कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किया जा रहा था या नहीं।
फिलहाल शुक्रवार सुबह प्रकाशित रिपोर्टों में तीन मजदूरों के बचने और चौथे मजदूर के मलबे में दबे होने की जानकारी दी गई है। बाद की स्थिति की पुष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। एक स्थानीय समाचार रिपोर्ट की शीर्षक-पंक्ति में मजदूर की मौत का उल्लेख भी मिलता है, लेकिन उसके विवरण में बचाव अभियान जारी बताया गया है। इसलिए चौथे मजदूर की वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
इस दुर्घटना ने निर्माणाधीन भवनों में सुरक्षा नियमों के सख्ती से पालन की आवश्यकता को एक बार फिर सामने रखा है। अब बचाव अभियान के अंतिम परिणाम और तकनीकी जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ तथा इसके लिए किसी स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं।