ISKCON पंढरपुर में रोबोटिक हाथी ‘ऐरावत’ लॉन्च

Update: 2026-07-25 04:55 GMT

पंढरपुर : महाराष्ट्र के पंढरपुर स्थित इस्कॉन मंदिर में गुरुवार को एक अनोखी पहल की शुरुआत हुई। मंदिर परिसर में ‘ऐरावत’ नामक एक मैकेनिकल हाथी का अनावरण किया गया। यह रोबोटिक हाथी आकार और बनावट में लगभग असली हाथी जैसा है। इसे पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया की ओर से इस्कॉन पंढरपुर को दान किया गया है।

यह मैकेनिकल हाथी देश के किसी मंदिर को PETA इंडिया की ओर से दान किया गया 29वां रोबोटिक हाथी है। वहीं, इस्कॉन पंढरपुर के श्री जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव में शामिल होने वाला यह अपनी तरह का पहला हाथी है। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में वास्तविक हाथियों के इस्तेमाल को समाप्त करना है।

‘ऐरावत’ का उद्घाटन श्री श्री राधा पंढरीनाथ मंदिर में परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज की व्यास पूजा के अवसर पर किया गया। यह कार्यक्रम हर साल आषाढ़ी एकादशी के मौके पर आयोजित किया जाता है। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मंदिर अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

उद्घाटन के बाद ऐरावत को श्री जगन्नाथ रथ यात्रा जुलूस में शामिल किया गया। इस भव्य आयोजन में महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री तथा सोलापुर जिले के संरक्षक मंत्री जयकुमार गोरे, पूर्व विधायक प्रशांतराव परिचारक, मंदिर प्रशासन के अधिकारी और हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

 इस मैकेनिकल हाथी को धार्मिक आयोजनों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक हाथियों के विकल्प के रूप में तैयार किया गया है। संगठन का कहना है कि मंदिरों और त्योहारों में हाथियों का इस्तेमाल कई बार उनके स्वास्थ्य और कल्याण के लिए चुनौती बन जाता है। ऐसे में रोबोटिक हाथी धार्मिक परंपराओं को जारी रखने के साथ-साथ पशु संरक्षण की दिशा में एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।

इस्कॉन पंढरपुर ने पहले ही यह निर्णय लिया था कि वह धार्मिक आयोजनों के लिए कभी भी असली हाथी नहीं रखेगा और न ही किराए पर लेगा। ‘ऐरावत’ का दान इसी निर्णय और पशु कल्याण के प्रति मंदिर की प्रतिबद्धता को सम्मान देने वाला कदम माना जा रहा है।

ऐरावत महाराष्ट्र में दान किया गया दूसरा मैकेनिकल हाथी है और इस्कॉन मंदिर को दिया गया तीसरा रोबोटिक हाथी है। इससे पहले भी संगठन देश के कई मंदिरों को ऐसे मैकेनिकल हाथी उपलब्ध करा चुका है, ताकि धार्मिक गतिविधियों में पशुओं के इस्तेमाल की आवश्यकता कम हो सके।

रोबोटिक हाथी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह धार्मिक जुलूसों और सांस्कृतिक आयोजनों में असली हाथी की तरह शामिल हो सके। इसका आकार, चलने की प्रक्रिया और बाहरी स्वरूप लोगों को आकर्षित करता है। इससे श्रद्धालुओं को पारंपरिक अनुभव भी मिलता है और पशुओं को होने वाली परेशानी से बचाया जा सकता है।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि धार्मिक आस्था और पशु कल्याण दोनों को साथ लेकर चलना समय की जरूरत है। ‘ऐरावत’ इसी सोच का उदाहरण है, जिसमें आधुनिक तकनीक के माध्यम से परंपराओं को बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

पंढरपुर में आषाढ़ी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। ऐसे में श्री जगन्नाथ रथ यात्रा में ऐरावत का शामिल होना श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पहल की सराहना की और इसे धार्मिक आयोजनों में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना था कि तकनीक के माध्यम से परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए पशुओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाई जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रोबोटिक हाथियों का इस्तेमाल धार्मिक स्थलों पर पशु संरक्षण के लिए एक सकारात्मक पहल हो सकती है। इससे जहां धार्मिक भावनाएं जुड़ी रहती हैं, वहीं जानवरों को भी अनावश्यक तनाव और कठिन परिस्थितियों से बचाया जा सकता है।

इस्कॉन पंढरपुर में ऐरावत का आगमन धार्मिक आयोजनों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का एक नया उदाहरण बन गया है। मंदिर प्रशासन और PETA इंडिया की यह पहल आने वाले समय में अन्य धार्मिक संस्थानों को भी पशु-अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

कुल मिलाकर, ‘ऐरावत’ केवल एक मैकेनिकल हाथी नहीं है, बल्कि यह परंपरा, तकनीक और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश का प्रतीक है। इस पहल से धार्मिक आयोजनों में बदलाव और संवेदनशीलता की एक नई दिशा सामने आई है।

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